देश की खबरें | असम उपचुनाव: पांच विस सीट के लिए प्रचार थमा

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गुवाहाटी, 11 नवंबर असम में पांच विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के वास्ते प्रचार सोमवार शाम थम गया। अधिसूचना जारी होने के बाद से ही सामगुरी और बेहाली सीट सुर्खियों में रहीं।

यह उपचुनाव धोलाई (सुरक्षित), सिदली (सुरक्षित), बोंगाईगांव, बेहाली और सामगुरी विधानसभा सीट पर हो रहा है। इन सीट से विधायकों के हाल के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के चलते उपचुनाव कराना जरूरी हो गया था।

निर्वाचन आयोग के आंकड़े के अनुसार, कुल 34 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से अधिकांश उम्मीदवार पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।

हालांकि इन निर्वाचन क्षेत्रों में किसी भी राष्ट्रीय नेता ने प्रचार नहीं किया, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने पांच निर्वाचन क्षेत्रों में कुछ जनसभाओं को संबोधित किया, जबकि केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल बेहाली में एक रैली में शामिल हुए।

असम में 16 दलों वाले विपक्षी गठबंधन में बेहाली के लिए उम्मीदवार चयन को लेकर दरार आ गई क्योंकि कांग्रेस ने यह सीट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन को देने के गठबंधन के प्रस्ताव से असहमति जताते हुए इस पर आखिरी समय में अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई यह सीट सहयोगी दल को नहीं देने को लेकर अड़े हुए थे और पार्टी उम्मीदवार जयंत बोरा के समर्थन में प्रचार के लिए पूरे प्रचार अभियान के दौरान वहां डेरा डाले रहे।

चुनाव प्रचार के शुरुआती दिनों में बेहाली से जुड़ी घटनाओं ने सुर्खियां बटोरीं। गोगोई के दबाव का मुकाबला करने के लिए शर्मा ने दो जनसभाओं को संबोधित किया और भाजपा उम्मीदवार दिगंत घाटोवाल के समर्थन में एक रोडशो किया।

बोरा और घाटोवाल के अलावा, संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के रूप में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से लखीकांत कुर्मी और आम आदमी पार्टी (आप) से अनंत गोगोई भी बेहाली में मैदान में हैं।

चुनाव प्रचार आगे बढ़ने के साथ ही, लोगों का ध्यान धीरे-धीरे सामगुरी की ओर गया, हालांकि सकारात्मक खबरों के लिए नहीं। उपचुनाव की घोषणा के बाद से सामगुरी में लगभग हर दिन हिंसा की घटनाएं सामने आयी हैं।

भाजपा और कांग्रेस के समर्थकों पर हमला किया गया और पूरे निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने निर्वाचन आयोग के समक्ष कई शिकायतें दर्ज कराई हैं।

दोनों राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे के नेताओं और समर्थकों पर गोलीबारी किये जाने के दावे किए, जबकि पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के दर्जनों वाहन तोड़े गए हैं।

सामगुरी उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन के बेटे तंजील को भाजपा उम्मीदवार दिप्लू रंजन शर्मा के खिलाफ पार्टी का उम्मीदवार बनाया है।

शनिवार को कांग्रेस समर्थकों ने तीन पत्रकारों के साथ बदसलूकी की और उनके साथ हाथापाई की। कुछ पत्रकारों ने दावा किया कि हाथापाई में उनके उपकरण भी क्षतिग्रस्त हो गए।

शनिवार रात को निर्दलीय उम्मीदवार मुसब्बिर अली अहमद आधी रात अपने घर के पास कटिमारी ग्रांट इलाके में एक सड़क पर बेहोशी की हालत में मिले। वह गंभीर रूप से घायल थे।

निर्वाचन आयोग ने दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटा दिया, जबकि कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई। इस साल धुबरी लोकसभा सीट से रिकॉर्ड 10.12 लाख से अधिक मतों से जीतने वाले हुसैन सांसद बनने से पहले लगातार पांच बार सामगुरी से विधायक रहे थे।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने तंजील को उम्मीदवार बनाने के लिए कांग्रेस की आलोचना की और कहा कि विपक्षी पार्टी की वंशवादी राजनीति प्रतिभाशाली युवाओं को राजनीति में आने से रोक रही है।

कांग्रेस ने भी भाजपा पर राष्ट्रीय स्तर से ही वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, साथ ही भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद द्वारा बोंगाईगांव से दीप्तिमयी चौधरी को उम्मीदवार बनाए जाने की ओर इशारा किया। वह एजीपी सांसद फणी भूषण चौधरी की पत्नी हैं, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में पहली बार संसद में कदम रखने से पहले 1985 से लगातार आठ बार बोंगाईगांव का प्रतिनिधित्व किया।

विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया ने मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए दावा किया कि मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों सहित कम से कम 30 शीर्ष भाजपा नेता सीधे राजनीतिक वंशवाद से जुड़े हैं।

चौधरी का सीधा मुकाबला कांग्रेस के ब्रजेंजीत सिंह से है। कांग्रेस की नजर सांसद की पत्नी के नामांकन के बाद क्षेत्रीय पार्टी में गंभीर असंतोष का फायदा उठाते हुए एजीपी से यह सीट छीनने पर है।

बराक घाटी के धोलाई में कांग्रेस ने भाजपा उम्मीदवार निहार रंजन दास की नागरिकता पर संदेह जताया और दावा किया कि एक स्थानीय भाजपा नेता ने सबसे पहले यह आरोप लगाया था।

मुख्यमंत्री शर्मा ने वहां अपनी दो सभाओं के दौरान दास को एक 'बांग्लादेशी' के रूप में पेश करने की कोशिश करने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि विपक्षी पार्टी की शीर्ष नेता सोनिया गांधी की राष्ट्रीयता पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।

दास को कांग्रेस उम्मीदवार ध्रुबज्योति पुरकायस्थ से कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है।

बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के सिदली में मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है, क्योंकि कांग्रेस ने 20 साल से अधिक समय के बाद कोई उम्मीदवार उतारा है।

कांग्रेस के संजीव वारी, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के निर्मल कुमार ब्रह्मा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के सुद्धो कुमार बसुमतारी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।

सिदली में कुल मिलाकर प्रचार अभियान गैर-विवादास्पद रहा और स्थानीय नेताओं ने कमान संभाली।

प्रचार के आखिरी दिन सभी दलों ने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में रोडशो निकाले, जहां बुधवार को मतदान होगा। मतों की गिनती 23 नवंबर को होगी।

पांच निर्वाचन क्षेत्रों के 1,078 मतदान केंद्रों पर नौ लाख से अधिक मतदाता मतदान करने के लिए पात्र हैं।

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