देश की खबरें | सटीक आंकड़ों की कमी से एशिया, प्रशांत क्षेत्र में सबसे कमजोर आबादी प्रभावित: संयुक्त राष्ट्र

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं रहने से कुछ सबसे कमजोर आबादी आधिकारिक आंकड़ों में अदृश्य रह जाती है, जिससे नीति निर्माताओं की एशिया और प्रशांत क्षेत्र में उनकी जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने की क्षमता सीमित हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र की एक नयी रिपोर्ट में यह कहा गया है।

नयी दिल्ली, 18 फरवरी सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं रहने से कुछ सबसे कमजोर आबादी आधिकारिक आंकड़ों में अदृश्य रह जाती है, जिससे नीति निर्माताओं की एशिया और प्रशांत क्षेत्र में उनकी जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने की क्षमता सीमित हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र की एक नयी रिपोर्ट में यह कहा गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजस्थान में सैकड़ों खानाबदोश आदिवासी परिवारों के सर्वेक्षण से लेकर इंडोनेशिया में स्वास्थ्य निगरानी मोबाइल ऐप तक के प्रयास किस प्रकार क्षेत्र में सतत विकास को बदल रहे हैं।

एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) की मंगलवार को जारी नयी रिपोर्ट से पता चला है कि कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों की आवाज को बढ़ावा देकर, ये समाधान न केवल नीतियों को अधिक समावेशी बना रहे हैं, बल्कि एशिया और प्रशांत क्षेत्र में सतत विकास निगरानी को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बना रहे हैं।

हालांकि, एशिया और प्रशांत एसडीजी प्रगति रिपोर्ट 2025 में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि 2030 तक 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिए अभी भी तीव्र कार्रवाई की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव और ईएससीएपी की कार्यकारी सचिव अर्मिडा साल्सियाह अलिसजाहबाना ने कहा, ‘‘आंकड़ों में अंतर बना रहता है और कुछ सबसे कमजोर आबादी आधिकारिक आंकड़ों में अदृश्य रह जाती है, जिससे नीति निर्माताओं की उनकी जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने की क्षमता सीमित हो जाती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सांख्यिकीय प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए सीमित संसाधन अतिरिक्त बाधाएं उत्पन्न करते हैं। प्रगति में तेजी लाने के लिए तत्काल कार्रवाई के बिना, कई लक्ष्य पहुंच से बाहर ही रहेंगे।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया और प्रशांत क्षेत्र में समुदाय महत्वपूर्ण डेटा अंतर को पाटने के लिए अभिनव समाधानों का नेतृत्व कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि नीति निर्माण में हाशिये पर पड़ी आबादी अब अदृश्य न रहे।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भारत में राजस्थान राज्य के सैकड़ों खानाबदोश आदिवासी परिवारों के सर्वेक्षण से लेकर इंडोनेशिया में स्वास्थ्य निगरानी मोबाइल ऐप तक, ये प्रयास क्षेत्र में सतत विकास को बदल रहे हैं।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ‘सेंटर फॉर सोशल इक्विटी एंड इन्क्लूजन’ ने समुदाय-आधारित संगठनों और कार्यकर्ताओं के मजबूत सहयोग से राजस्थान के आठ स्थानों पर 400 खानाबदोश आदिवासी परिवारों का सर्वेक्षण किया।

इसका उद्देश्य इन आदिवासी परिवारों की विकास चुनौतियों का आकलन करना और सामाजिक सुरक्षा तक समुदाय की पहुंच का विवरण इकट्ठा करना था। इस पहल ने सतत विकास लक्ष्यों को स्थानीय बनाने के लिए सामुदायिक स्तर की जानकारी की शक्ति पर प्रकाश डाला।

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