विदेश की खबरें | पेलोसी के सिंगापुर पहुंचने के साथ उनका एशिया दौरा शुरू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सप्ताहांत में एक बयान में पेलोसी ने कहा था कि वह व्यापार, कोविड-19 महामारी, जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और ‘लोकतांत्रिक शासन’ पर चर्चा करने के लिए मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान का भी दौरा करेंगी। हालांकि, उन्होंने ताइवान का दौरा कर सकने संबंधी खबरों की पुष्टि नहीं की थी। उल्लेखनीय है कि चीन इसे अपना क्षेत्र होने का दावा करता है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

सप्ताहांत में एक बयान में पेलोसी ने कहा था कि वह व्यापार, कोविड-19 महामारी, जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और ‘लोकतांत्रिक शासन’ पर चर्चा करने के लिए मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान का भी दौरा करेंगी। हालांकि, उन्होंने ताइवान का दौरा कर सकने संबंधी खबरों की पुष्टि नहीं की थी। उल्लेखनीय है कि चीन इसे अपना क्षेत्र होने का दावा करता है।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पिछले सप्ताह अपने अमेरिकी समकक्ष जो बाइडन के साथ टेलीफोन पर की गई वार्ता में ताइवान के मामले में हस्तक्षेप करने के खिलाफ चेतावनी दी थी।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष की यात्रा की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने पेलोसी और उनके प्रतिनिधिमंडल के आज तड़के सिंगापुर पहुंचने की पुष्टि की।

सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि पेलोसी सिंगापुर की राष्ट्रपति हलीमा याकूब और प्रधानमंत्री ली सीन लूंग तथा कई कैबिनेट मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगी।

सिंगापुर में ‘अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स’ के एक स्वागत कार्यक्रम में भी पेलोसी के शामिल होने की उम्मीद है। उनकी यात्रा के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहने के कारण मीडिया को उनके कार्यक्रमों से दूर रखा गया है।

चीन को लगता है कि ताइवान के साथ आधिकारिक अमेरिकी संपर्क उसकी दशकों पुरानी उस नीति के खिलाफ उसे (ताइवान को) उकसाता है, जिसके तहत वह उसे ‘वास्तविक, स्वतंत्रता और स्थायी क्षेत्र’ मानता है। हालांकि, अमेरिकी नेताओं का कहना है कि वे चीन के इस दृष्टकोण का समर्थन नहीं करते हैं।

पेलोसी यदि ताइवान का दौरा करती हैं, तो वह 1997 में प्रतिनिधि सभा के तत्कालीन अध्यक्ष न्यूट गिंगरिच के बाद ताइवान की यात्रा करने वाली सर्वोच्च पद पर आसीन पहली निर्वाचित अमेरिकी अधिकारी होंगी।

बाइडन प्रशासन ने बीजिंग को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि अगर ऐसी यात्रा होती है, तो यह अमेरिकी नीति में किसी बदलाव का संकेत नहीं होगा।

एपी

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