नयी दिल्ली, 15 मई सेना अपनी घुड़सवार इकाई 61वीं कैवलरी को एक बख्तरबंद रेजिमेंट में बदलने की योजना बना रही है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
61वीं कैवलरी की स्थापना 1953 में हुई थी और फिलहाल यह काफी हद तक एक रस्मी इकाई ही है।
सूत्रों का कहना है कि सेना जयपुर स्थित 61वीं कैवलरी को बख्तरबंद रेजिमेंट में बदलने की तैयारी कर रही है और इसे टैंकों से सुसज्जित किया जा सकता है जिससे इसके मौजूदा रस्मी स्वरूप को बदलकर इसे युद्धक बल बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस बल के पास उपलब्ध घोड़ों से एक “अश्वारोही उत्कृष्टता” केंद्र बनाने की भी योजना है।
सेना की इस घुड़सवार इकाई ने गणतंत्र दिवस समारोह में भी हिस्सा लिया है। मौजूदा वक्त में रस्मी राष्ट्रपति के अंगरक्षक (पीबीजी) और 61वीं कैवलरी ही देश में स्थित घुड़सवार सैन्य इकाइयां हैं।
ऐतिहासिक रूप से बात करें तो घुड़सवार इकाइयों ने निर्णायक लड़ाईयों में अहम भूमिका निभाई है जैसे 1918 में इज़राइल में लड़ी गई हाइफा की लड़ाई।
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