देश की खबरें | धर्मांतरण मामले में आर्चबिशप, सिस्टर को प्रदान की गई अग्रिम जमानत पर रोक लगाने से इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने एक अनाथालय में हिंदू बच्चों को ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए मजबूर करने के आरोपी आर्चबिशप और एक सिस्टर को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दी गई अग्रिम जमानत पर रोक लगाने से सोमवार को इनकार कर दिया।

नयी दिल्ली, 14 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने एक अनाथालय में हिंदू बच्चों को ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए मजबूर करने के आरोपी आर्चबिशप और एक सिस्टर को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दी गई अग्रिम जमानत पर रोक लगाने से सोमवार को इनकार कर दिया।

शीर्ष अदालत ने हालांकि, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और मध्य प्रदेश सरकार की अलग-अलग अपीलों पर 77 वर्षीय आर्चबिशप जेराल्ड अल्मेडा और सिस्टर लिली जोसेफ को नोटिस जारी किया।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए... हम अग्रिम जमानत पर रोक नहीं लगा सकते और हम उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर भी रोक नहीं लगा सकते।’’

पीठ ने एनसीपीसीआर और राज्य सरकार की याचिकाओं को दो सप्ताह के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि धर्म परिवर्तन की शिकायत केवल वही व्यक्ति दर्ज करा सकता है जो रक्त, विवाह या गोद लेने, संरक्षण के जरिये संबंधित हो, कोई और नहीं।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि पीड़ित पक्ष की शिकायत के अभाव में, पुलिस के पास मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत अपराध की जांच करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

एनसीपीसीआर अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कटनी जिले में आशा किरण संस्थान का दौरा किया था जिसके बाद आर्चबिशप जेराल्ड अल्मेडा और लिली जोसेफ को गिरफ्तार कर लिया गया था।

छात्रों के पास से बाइबिल मिलने का दावा किए जाने के बाद एनसीपीसीआर प्रमुख ने कथित धर्मांतरण की शिकायत दर्ज कराई थी।

उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देते हुए आशा किरण संस्थान को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया था कि अनाथों या वहां रह रहे बच्चों को धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं की जाएगी।

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