नयी दिल्ली, 28 मार्च केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को बिहार की कोसी मेची अंत:राज्यीय लिंक परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (पीएमकेएसवाई-एआईबीपी) के अंतर्गत शामिल करने को मंजूरी दे दी ताकि क्षेत्र में सिंचाई का विस्तार हो और बाढ़ का उपयुक्त प्रबंधन हो।
इस परियोजना में मौजूदा पूर्वी कोसी मुख्य नहर के पुनर्निर्माण के माध्यम से कोसी नदी के अतिरिक्त जल के एक हिस्से को बिहार में महानंदा बेसिन में सिंचाई के वास्ते पहुंचाने की परिकल्पना की गई है।
इस परियोजना पर 6,282.32 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है जिसमें बिहार को 3,652.56 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता के तौर पर मिलेगा। इस परियोजना के पूरा होने की समय सीमा मार्च, 2029 रखी गयी है।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां प्रेसवार्ता में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि परियोजना के बारे में नेपाल के साथ चर्चा हुई है और इससे बिहार में बाढ़ प्रबंधन पर बड़ा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
यह पूछे जाने पर कि क्या बिहार चुनाव से पहले ऐसी और परियोजनाओं की घोषणा की जाएगी, उन्होंने कहा कि निर्णय ‘पूरे देश के लिए’ लिए जा रहे हैं।
कोसी मेची अंत:-राज्यीय लिंक परियोजना का उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को बिहार में महानंदा बेसिन की ओर ले जाना है। यह पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) के 41.30 किलोमीटर तक पुनर्निर्माण और 117.50 किलोमीटर पर मेची नदी तक इसके विस्तार के माध्यम से हासिल किया जाएगा।
इस परियोजना का उद्देश्य खरीफ सीजन के दौरान अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों में 2,10,516 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा प्रदान करना है।
इससे वर्तमान ईकेएमसी प्रणाली द्वारा सिंचित 1.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जल आपूर्ति में कमी की भी भरपाई हो जाएगी। मानसून के दौरान कोसी से लगभग 205 करोड़ घन मीटर अधिशेष पानी महानंदा कमांड क्षेत्र में भेजा जाएगा।
यह परियोजना व्यापक पीएमकेएसवाई-एआईबीपी पहल का हिस्सा है, जिसे सिंचिंत क्षेत्र के विस्तार और जल संरक्षण प्रयासों में सुधार के लिए 2015-16 में शुरू किया गया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY