देश की खबरें | विश्व में वितरण का कोई भी अन्य माध्यम भारतीय डाक जितना व्यापक नहीं : सिंधिया

बेंगलुरु, 10 जुलाई केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया में वितरण का कोई भी अन्य माध्यम भारतीय डाक जितना व्यापक या गहराई तक फैला नहीं है।

सिंधिया ने डाक कर्मचारियों से वस्तुओं को लाने-ले जाने की सुविधा मुहैया कराने वाला (लॉजिस्टिक) दुनिया का सबसे बड़ा संगठन बनने दिशा में काम करने का भी आग्रह किया।

उन्होंने बेंगलुरु के के.पी. पुत्तन चेट्टी टाउन हॉल में ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारतीय डाक विभाग के कश्मीर से कन्याकुमारी और भरूच से तवांग तक 1.64 लाख कार्यालय हैं।’’

केंद्रीय संचार मंत्री ने कहा कि हालांकि डाकघरों में हाथ में पकड़े जा सकने वाले उपकरणों समेत आधुनिक उपकरण और दर्पण (नए भारत के लिए ग्रामीण डाकघरों का डिजिटल उन्नयन) जैसी परियोजनाएं हैं लेकिन डाक कर्मचारियों को वास्तविक बदलाव लाने के लिए अपने काम करने के तरीके में बदलाव लाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज, हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा ‘लॉजिस्टिक’ संगठन बनने की क्षमता है। हमारे अलावा किसी और के पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन नहीं हैं लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अग्रणी रहें। इसका मतलब है कि हमें नवोन्मेष करने की जरूरत है। हमें उत्पादकता के बारे में सोचना होगा।’’

मंत्री ने यह भी कहा कि समय के साथ चलने के लिए डाकघर को ग्राहकों के लिए नए उत्पाद पेश करने होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, अब हम म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए केवाईसी करने का काम शुरू कर रहे हैं।’’

सिंधिया ने कहा कि भारतीय डाक ग्राहक-केंद्रित संगठन तभी बन सकता है जब 2,74,000 कर्मचारियों में से प्रत्येक समान समर्पण, जुनून और उत्साह के साथ काम करें।

उन्होंने भरोसा दिया कि भारतीय डाक को अपने डाकघरों में बदलाव करने के लिए पर्याप्त पूंजीगत व्यय प्राप्त होगा। मंत्री ने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे डाकघरों में बदलाव के लिए आवश्यक कार्य सुनिश्चित करें।

सिंधिया ने कहा, ‘‘हम सेवा-संचालित बनने जा रहे हैं, और हम यह सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि हम स्वयं को भार के बदले भारत सरकार के लिए लाभ के केंद्र में परिवर्तित कर लें।’’

सिंधिया ने कहा कि जब तक डाकघर आम आदमी के लिए दुनिया की खिड़की नहीं बन जाते, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश के नागरिक को जो कुछ भी चाहिए, जिसकी उसे ज़रूरत है, जो भी चाहिए, वह सब हमारे डाकघरों में होना चाहिए।’’

कार्यक्रम के दौरान, कर्नाटक के 15 डाक सेवकों को उनकी उत्कृष्ट सेवा और समर्पण के लिए सम्मानित किया गया।

मंत्री के मुताबिक ग्रामीण डाक सेवक कोई नौकरी नहीं करता। उन्होंने उस समय को याद किया जब वे बोर्डिंग स्कूल में थे और अपने परिवार के पत्रों का बेसब्री से इंतज़ार करते थे।

सिंधिया ने कहा, ‘‘मेरा ग्रामीण डाक सेवक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पत्र के रूप में भावना पहुंचाता है - आप इसका मौद्रिक मूल्य नहीं लगा सकते।’’

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