देश की खबरें | नशा विरोधी अभियान : हरिद्वार से चंडीगढ़ तक बग्घी खींचेंगे पहलवान रवींद्र तोमर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हरियाणा के जींद निवासी पहलवान रवींद्र तोमर नशे के खिलाफ अपने अभियान के तहत एक अनोखी कांवड़ पर अपने हाथों से बग्घी खींचते हुए सहारनपुर पहुंचे।

सहारनपुर (उप्र), आठ जुलाई हरियाणा के जींद निवासी पहलवान रवींद्र तोमर नशे के खिलाफ अपने अभियान के तहत एक अनोखी कांवड़ पर अपने हाथों से बग्घी खींचते हुए सहारनपुर पहुंचे।

सहारनपुर में कांवड़ यात्रा मार्ग से गुजरते हुए लोगों का ध्यान जब अपने हाथों से बग्घी खींचते पहलवान रवींद्र तोमर पर पड़ा तो उनमें से कई लोग रुक कर उन्हें देखने लगे और कुछ ने आगे बढ़कर उनके साथ सेल्फी ली। तोमर नशे की लत के खिलाफ एक असरदार संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

तोमर 20 जून को अपने गांव सफीदो से नशे के खिलाफ जागरुकता फैलाने के संकल्प के साथ निकले थे। हरिद्वार में गंगा नदी से पवित्र जल एकत्र करने के बाद अब वह चंडीगढ़ जा रहे हैं। वहां उनकी योजना 23 जुलाई को महाशिवरात्रि के दिन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पवित्र जल से स्नान कराने की है।

तोमर ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें हरियाणा में मुख्यमंत्री के नशा विरोधी अभियान से प्रेरणा मिली। मुख्यमंत्री के प्रयासों से 700 गांव नशा मुक्त हो गए हैं।

उन्होंने कहा, ''यह मुख्यमंत्री को उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देने का मेरा तरीका है। मैं चंडीगढ़ में उनके आवास पर जाऊंगा और उनसे अनुरोध करूंगा कि वे इस अभियान के समर्थन में प्रतीकात्मक रूप से गंगा जल से स्नान करें।''

तोमर ने कहा कि उनका यह मिशन बेहद निजी है। उन्होंने कहा, ''मेरे चचेरे भाई की नशे की लत के कारण मौत हो गई थी। उस दिन मैंने युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित करने का फैसला किया।''

न सिर्फ एक बड़ा जज्बा, बल्कि तोमर की शारीरिक क्षमता भी उनकी इस यात्रा को अलग बनाती है। वह केवल दूध और दही के सहारे तपती गर्मी में खुद बग्घी को खींच रहे हैं।

उन्होंने कहा, ''अगर मैं नशे का आदी होता तो यह कभी संभव नहीं होता। असली ताकत दूध और दही से मिलती है, नशीले पदार्थों से नहीं।''

तोमर की इस यात्रा को व्यापक जनसमर्थन भी मिल रहा है। जब वह गांवों और कस्बों से गुजरते हैं तो उनसे मिलने, सेल्फी लेने और उनका संदेश सुनने के लिए भीड़ उमड़ पड़ती है। तोमर विशेष रूप से युवाओं से नशीली दवाओं से दूर रहने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की अपील करने के लिए करते हैं।

तोमर के इस गैर-परंपरागत अभियान को स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से समान रूप से व्यापक तारीफ मिली है। कई लोग उनकी यात्रा को न केवल कांवड़ यात्रा के रूप में देखते हैं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के एक प्रेरक प्रतीक के रूप में भी देख रहे हैं।

तोमर ने कहा कि उन्होंने अब नशा विरोधी अभियान को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। यहां तक कि नशा मुक्त समाज का संदेश फैलाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी और कुश्ती करियर भी छोड़ दिया है।

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