देश की खबरें | ‘प्रतिशोधी, अमानवीय आचरण, कम दोषसिद्धि’ : जब ईडी को न्यायालय ने फटकार लगाई
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नयी दिल्ली, 13 फरवरी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को अपनी जांच को लेकर अकसर उच्चतम व उच्च न्यायालयों में खिंचाई का सामना करना पड़ा है।
हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने एक पूर्व आबकारी अधिकारी को जेल में रखने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का इस्तेमाल करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की खिंचाई की और पूछा कि क्या दहेज कानून की तरह इस प्रावधान का भी ‘‘दुरुपयोग’’ किया जा रहा है।
बारह फरवरी को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने ये टिप्पणी की।
एक अन्य अवसर पर, शीर्ष अदालत ने हरियाणा में कांग्रेस के पूर्व विधायक से 15 घंटे की लंबी पूछताछ पर ईडी के ‘‘मनमाने’’ और ‘‘अमानवीय आचरण’’ की निंदा की थी। ये पूछताछ आधी रात के बाद तक चली थी।
धन शोधन के एक अन्य मामले में एक महिला की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ईडी ने उसकी याचिका का विरोध करने के लिए ‘‘पीएमएलए के प्रावधानों के विपरीत’’ दलीलें दी हैं।
इसने कहा, ‘‘हम केंद्र सरकार द्वारा कानून के विपरीत दलीलें देने के आचरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
संघीय जांच एजेंसी ने एक पूर्व आईएएस अधिकारी को समन जारी किया और गिरफ्तार कर लिया। शीर्ष अदालत ने ईडी द्वारा अपनी कार्रवाई को अंजाम देने में दिखाई गई ‘‘जल्दबाजी’’ पर सवाल उठाया।
अदालत ने कहा, ‘‘आतंकवाद या आईपीसी में गंभीर अपराधों के मामलों में भी ऐसा नहीं होता है।’’
न्यायालय ने धन शोधन के मामलों में दोषसिद्धि की कम दर को रेखांकित किया और ईडी से अभियोजन और साक्ष्य की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।
संसद में दिए गए एक बयान का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा था कि ईडी को दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए विज्ञान आधारित जांच करनी चाहिए।
ऐसे भी उदाहरण हैं जब उच्च न्यायालयों ने जांच के तौर-तरीकों के लिए एजेंसी की निंदा की है।
एक मामले में, बंबई उच्च न्यायालय ने ईडी से कहा था कि सोने का अधिकार एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता है और रात भर बयान दर्ज करने के लिए इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। एक अन्य मामले में, बंबई उच्च न्यायालय ने ईडी को नागरिकों को परेशान करने और कानून को अपने हाथ में लेने के खिलाफ चेताया था।
नवंबर 2024 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एजेंसी की जांच को ‘‘लापरवाही भरा और गैर-पेशेवर’’ करार देते हुए ईडी निदेशक से खामियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था।
शफीक पवनेश
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