देश की खबरें | इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वकीलों की हड़ताल पर असंतोष जताया

प्रयागराज, 13 सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 30 अगस्त से जारी अधिवक्ताओं की हड़ताल पर असंतोष जताया है और इन अधिवक्ताओं ने हापुड़ घटना के विरोध में पूरे प्रदेश में न्यायिक कार्य करने से मना कर दिया है।

न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र ने दिनेश कुमार नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, मुकदमे ऐसी वस्तुएं नहीं हैं जिन्हें महज आंकड़े माना जाए। इनका उद्देश्य वकीलों को केवल आजीविका उपलब्ध कराना या न्यायाधीशों को मासिक निस्तारण कोटा उपलब्ध कराना नहीं है।

अदालत ने कहा, एक न्यायाधीश के सामने आने वाले प्रत्येक मामले में एक मानव समस्या का तत्व होता है, जो नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, आजीविका, पारिवारिक कारोबार, पेशा, कार्य, आश्रय एवं सुरक्षा से जुड़़ा होता है।

अदालत ने आगे कहा, इनमें से कई वादी वंचित और कमजोर वर्ग से आते हैं जो असहाय, गरीब और उपेक्षित हैं, इनकी शिकायतों और समस्याओं के एक सभ्य मानव समाधान के लिए इनका मौन रुदन न्याय मांगता है जिसे न केवल न्यायाधीशों, बल्कि अधिवक्ताओं द्वारा महसूस किया जाना और सुना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लेकिन दुर्भाग्य से अधिवक्ता चाहे जिस भी कारण से इस रुदन को नहीं सुन रहे हैं।

अदालत ने कहा कि अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने पर उसके पास कई विकल्प हैं जिसमें अधिवक्ताओं द्वारा अपने मुवक्किल की पैरवी नहीं करने पर मामला खारिज करना शामिल है। लेकिन अदालत ऐसा कोई आदेश पारित नहीं कर रही, बल्कि मामलों की सुनवाई आगे बढ़ा रही है।

अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 13 अक्टूबर निर्धारित की है।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं की हड़ताल को देखते हुए मंगलवार से वीडियो कान्फ्रेंस से सुनवाई की व्यवस्था शुरू की है।

हापुड़ के अदालत परिसर में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज की घटना के संबंध में शासन द्वारा कोई सकारात्मक निर्णय नहीं किए जाने के विरोध में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 13 और 14 सितंबर को न्यायिक कार्य से विरत रहने का ऐलान किया है।

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