लखनऊ, 27 जून समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव की उपचुनाव में प्रचार से दूरी और मुसलमानों के एक बड़े वर्ग का समर्थन न मिलना आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीटों पर पार्टी की हार का एक कारण हो सकती है।
दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल करने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्य के शीर्ष नेताओं ने उप चुनावों में जीत की गति बनाये रखने के लिए कड़ी मेहनत की।
उप चुनाव परिणाम ने सपा के जिताऊ ‘एमवाई’ (मुस्लिम-यादव) फार्मूले के टूटने के साथ ही मोदी और योगी (एमवाई) के नाम पर भाजपा के पक्ष में मजबूती का भी संकेत दिया है।
रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों की जीत से उत्साहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इन परिणामों के जरिए जनता ने वर्ष 2024 के आगामी लोकसभा चुनाव के लिए 'दूरगामी संदेश' दे दिया है।
योगी ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और भाजपा की 'सबका साथ, सबका विकास, सब का प्रयास तथा सबका विश्वास' की घोषित नीति पर जनता की मुहर का प्रतीक है।
हालांकि इसके विपरीत सपा नेताओं ने पार्टी की हार का ठीकरा सत्तारूढ़ दल पर ही फोड़ा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई सपा नेताओं ने दोनों सीटों पर हार का श्रेय सत्ताधारी दल द्वारा सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को दिया है।
आजमगढ़ उप चुनाव में भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव "निरहुआ" ने सपा के धर्मेंद्र यादव को हराया, जबकि आजम खान के गढ़ रामपुर में भाजपा के घनश्याम लोधी ने असीम राजा को 42 हजार से अधिक मतों से हराया।
विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बावजूद आदित्यनाथ व अन्य भाजपा नेताओं ने राज्य में चुनावी जीत की गति को बनाए रखने के लिए दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रियता बनाये रखी और उनके लगातार दौरे भी हुए। हालांकि मुख्य विपक्षी दल के प्रमुख अखिलेश यादव ने उप चुनाव से दूरी बनाये रखी और चुनाव प्रचार के लिए निकले भी नहीं।
मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) रामपुर सीट पर नहीं लड़ी लेकिन आजमगढ़ सीट पर बसपा उम्मीदवार शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने सपा का खेल बिगाड़ दिया।
हालांकि 2019 में आजमगढ़ सीट सपा ने बसपा के गठबंधन से ही जीती थी। 2014 में जमाली ने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के मुकाबले किस्मत आजमाई थी लेकिन तब यादव ने 'मोदी लहर' के बावजूद सीट जीत ली थी।
आजमगढ़ में निरहुआ को 3,12,768 वोट (34.39 फीसदी), सपा के धर्मेंद्र को 3,04,089 (33.44 फीसदी) वोट मिले। बसपा प्रत्याशी शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को 2,66,210 (29.27 फीसदी) वोट मिले।
चुनाव पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनाव प्रचार में अखिलेश की अनुपस्थिति ने पार्टी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया। हालांकि पार्टी के कई नेता इससे असहमत हैं।
आजमगढ़ के मुबारकपुर विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक अखिलेश यादव ने 'पीटीआई-' से कहा कि ''इस उपचुनाव में डबल इंजन वाली सरकार ने लोगों को हर तरफ से डरा दिया था। छोटे व्यापारियों, ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के सदस्यों को अधिकारियों ने धमकाया। भाजपा ने चुनावों में व्यापक धांधली की।"
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