देश की खबरें | गोपनीय सामग्री हटाए जाने के बाद पुस्तक के प्रकाशन पर विचार करे वायुसेना: अदालत

नयी दिल्ली, एक मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय वायुसेना और खुफिया निदेशालय से सोमवार को इस बात पर विचार करने को कहा कि क्या वायुसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी द्वारा लिखी गई किताब को कुछ “गोपनीय” सामग्री को हटाने के बाद प्रकाशित किया जा सकता है।

पुस्तक के प्रकाशन की अनुमति के लिए सेवानिवृत्त अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता और संबंधित अधिकारियों के बीच एक महीने के भीतर बैठक हो और इस पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

प्रतिवादी अधिकारियों ने कहा कि पुस्तक के प्रकाशन के लिए मंजूरी नहीं दी जा सकती क्योंकि इसकी सामग्री भारतीय वायुसेना के हितों के अनुकूल नहीं है।

अदालत को बताया गया कि आपत्तिजनक सामग्री में "काउंटर-इंटेलिजेंस ऑपरेशंस" के बारे में कुछ जानकारी शामिल है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह आपत्तिजनक हिस्से को संशोधित करने या हटाने के लिए तैयार है।

अदालत ने आदेश दिया, "याचिकाकर्ता की बात भारतीय वायुसेना और खुफिया निदेशालय के अधिकारियों द्वारा सुनी जानी चाहिए, ताकि इस बात की संभावना का पता लगाया जा सके कि सामग्री में संशोधन किए जाने या इसे हटाए जाने के बाद पुस्तक को प्रकाशित किया जा सकता है या नहीं।"

याचिकाकर्ता एक पूर्व ग्रुप कैप्टन हैं।

उन्होंने अदालत को बताया कि उन्होंने अपने अनुभवों पर किताब लिखने का फैसला किया और सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर आवेदन के जवाब में मिले एक प्रश्न के उत्तर के अनुसार, किसी सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी के काल्पनिक किताब लिखने के संबंध में कोई दिशानिर्देश निर्धारित नहीं हैं।

अदालत ने अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को भी कहा।

मामले में अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को होगी।

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