देश की खबरें | एम्स और सफदरजंग में इलाज के लिए आने वाले लद्दाख के लोगों के लिए आशा की किरण थे लोबजांग

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नयी दिल्ली, छह मई बौद्ध भिक्षु लामा लोबजांग दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और सफदरजंग अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लद्दाख के लोगों के लिए आशा की किरण थे।

लामा लोबजांग को मरणोपरांत पिछले सप्ताह पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

लोबजांग लद्दाख से आने वाले लोगों को एम्स और सफदरजंग ने इलाज के दौरान उन्हें मार्गदर्शन देते थे, जिसमें उनके रहने की व्यवस्था भी शामिल थी।

‘अशोक मिशन’ के अध्यक्ष के रूप में लोबजांग ने लद्दाख के लोगों के लिए सुलभ चिकित्सा देखभाल का एक सहयोगी कार्यक्रम शुरू करने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई थी।

मिशन के महासचिव ताशी मोटुप काऊ ने कहा कि लोबजांग ने लद्दाखी बच्चों को उच्च शिक्षा तक पहुंच में सक्षम बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

काऊ ने अपने चाचा की ओर से पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त किया।

लोबजांग का पिछले वर्ष मार्च में निधन हो गया था।

उन्होंने कहा, “मेरे चाचा (लोबजांग) ने अपने जीवन के पांच से छह दशक लद्दाख क्षेत्र के कल्याण के लिए बिताए। उन्हें आस्था के प्रति उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया लेकिन उन्हें इस बात के लिए याद किया जाएगा कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहल के माध्यम से लद्दाखी लोगों के जीवन को कितनी गहराई से छुआ।”

काऊ ने कहा, “लद्दाख के लोग उन्हें (लोबजांग) प्यार से ‘मेमे ले’ के नाम से जानते थे। उनके नेतृत्व में, दिल्ली में अशोक मिशन एक चिकित्सा मिशनरी केंद्र बन गया है।”

उन्होंने कहा कि एक जनवरी, 1931 को लेह में जन्मे लोबजांग 1980 से 1983 तक भारत सरकार की अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों पर गठित उच्चाधिकार समिति के सदस्य थे।

लोबजांग 1984 से 2007 तक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य रहे थे।

उन्होंने इन वर्षों के दौरान पांच कार्यकाल तक इस पद पर कार्य किया।

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) के संस्थापक महासचिव के रूप में लोबजांग ने बौद्ध संगठनों को वैश्विक स्तर पर एकजुट करने और बौद्ध विरासत के पुनरोद्धार के प्रयासों में भाग लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आईबीसी वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय का एक प्रतिष्ठित संगठन है, जिसका मुख्यालय नयी दिल्ली में है।

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