नयी दिल्ली, 31 दिसंबर इस वर्ष देश के कृषि क्षेत्र के विकास पर मौसम की बदलती प्रकृति का कहर देखने को मिला जिससे गेहूं और धान की फसलें प्रभावित हुईं और इनकी खुदरा कीमतों में तेजी देखने को मिली। इस परिस्थिति में सरकार को पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था में खाद्यान्न आपूर्ति को संभालने के लिए निर्यात पर प्रतिबंध लगाने समेत विभिन्न नीतिगत कदम उठाने पड़े।
अगर वर्ष 2021 कृषि कानूनों की वजह से यह क्षेत्र सुर्खियों में था तो वर्ष 2022 को कृषि-खाद्य क्षेत्र में हुए कई बदलावों की वजह से जाना जायेगा । जहां सर्दियों में बारिश की कमी और गर्म हवा ने कुछ प्रमुख फसलों के उत्पादन को प्रभावित किया, वहीं रूस-यूक्रेन संघर्ष ने कई वस्तुओं और उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि कर दी।
मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर पर होने के बीच सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत वर्ष 2022 तक 80 करोड़ से अधिक लोगों को अतिरिक्त पांच किलोग्राम खाद्यान्न मुफ्त प्रदान किया।
सरकार ने अब 31 दिसंबर, 2023 तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत नियमित रूप से हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम का मुफ्त राशन देने का निर्णय लिया है।
जहां तक कृषि उपज का सवाल है तो सरकारी अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नया साल बेहतर होगा। चालू रबी सत्र में खेती का रकबा बढ़ा है क्योंकि मुख्य रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी से किसानों को प्रोत्साहन मिला है। कुछ आवश्यक खाद्य पदार्थों के दाम अधिक रहने से वर्ष 2023 में भी किसानों और उपभोक्ताओं के हितों में संतुलन साधने की चुनौती बनी रहेगी।
राष्ट्रीय वर्षा-सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक दलवई ने पीटीआई- से कहा, ''कृषि क्षेत्र ने 2022 में कुल मिलाकर अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन मौसम की गड़बड़ी से कुछ फसलों पर असर पड़ा। हमें उम्मीद है कि अगला वर्ष कहीं बेहतर साबित होगा और फिलहाल गेहूं फसल की अच्छी संभावना है।’’
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