प्रयागराज, पांच अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा की जामा मस्जिद का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सर्वेक्षण करने का निर्देश देने संबंधी एक याचिका पर एएसआई के वकील को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा।
याचिका में दावा किया गया कि कृष्ण जन्मभूमि में ठाकुर केशव देव की जिन प्रतिमाओं की पूजा की जाती थी उन्हें औरंगजेब की सेना द्वारा 1670 में हमले के बाद उस मस्जिद में दफनाया था।
याचिकाकर्ताओं ने जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए इस मामले में अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किए जाने की भी मांग की।
न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने बृहस्पतिवार को उक्त आदेश पारित करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 12 अगस्त, 2024 तय की।
अदालत ने साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद की प्रबंधन समिति द्वारा पक्षकार बनाने के आवेदन पर हिंदू वादकारियों को आपत्ति दाखिल करने का भी समय दिया।
याचिका में शाही मस्जिद की कमेटी ने अदालत से इस मामले में स्वयं को पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध किया।
अदालत ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले से जुड़े 18 मुकदमों में से एक पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।
इस मुकदमे में हिंदू वादी ने दावा किया कि औरंगजेब ने 1670 में केशव देव का मंदिर ध्वस्त कर दिया था और प्रतिमा को आगरा में जामा मस्जिद के नीचे दफन कर दिया था।
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