देश की खबरें | 'गुजरात आतंकवाद रोधी कानून आने के बाद संगठित अपराध न करने वालों पर इसके तहत मुकदमा नहीं'

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि यदि कोई व्यक्ति 2019 में गुजरात आतंकवाद रोधी कानून लागू होने के बाद संगठित अपराध में संलिप्त नहीं रहा है तो उसके खिलाफ इस तरह के पूर्व अपराधों के लिए संबंधित अधिनियम के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

नयी दिल्ली, 16 दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि यदि कोई व्यक्ति 2019 में गुजरात आतंकवाद रोधी कानून लागू होने के बाद संगठित अपराध में संलिप्त नहीं रहा है तो उसके खिलाफ इस तरह के पूर्व अपराधों के लिए संबंधित अधिनियम के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2015 एक दिसंबर, 2019 को लागू हुआ था।

न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के 2015 के शिवाजी रामाजी सोनवणे बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले से संबंधित फैसले पर फिर से विचार करने की आवश्यकता नहीं है जिसमें महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के लागू होने के बाद किसी व्यक्ति के कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं करने के मामले से निपटा गया था।

पीठ ने संदीप ओमप्रकाश गुप्ता को राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने को चुनौती देने वाली गुजरात सरकार की याचिका पर बड़े कानूनी सवाल का जवाब दिया, जिस पर पिछले अपराधों के लिए कठोर गुजरात आतंकवाद रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पीठ ने बृहस्पतिवार को दिए अपने फैसले में कहा, "हमें कुछ महत्वपूर्ण चीजों को स्पष्ट करने की जरूरत है। शिवा उर्फ ​​शिवाजी रामाजी सोनवणे (2015 का फैसला) उस स्थिति से निपटता है जहां कोई व्यक्ति मकोका लागू होने के बाद कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं करता है।"

इसने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में, उक्त अधिनियम के लागू होने से पहले व्यक्ति द्वारा किए गए अपराधों के कारण उसे उक्त अधिनियम के तहत गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, भले ही वह उसी के लिए दोषी पाया गया हो।"

पीठ ने कहा कि हालांकि, अगर कोई व्यक्ति गैरकानूनी गतिविधियां जारी रखता है और 2015 के अधिनियम की घोषणा के बाद गिरफ्तार किया जाता है, तो कानून के तहत उस पर अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।

पीठ ने कहा, "यदि कोई व्यक्ति उक्त अधिनियम के बाद किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होना बंद कर देता है, तो उसे इसके (संबंधित कानून) तहत अभियोजन से छूट दी जाती है।"

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