ताजा खबरें | अनधिकृत योजनाएं चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई : सरकार

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. सरकार ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि सरकार और प्रवर्तन एजेंसियों ने अनधिकृत योजनाएं चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और इन मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं।

नयी दिल्ली, आठ अगस्त सरकार ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि सरकार और प्रवर्तन एजेंसियों ने अनधिकृत योजनाएं चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और इन मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं।

लोकसभा में राजा अमरेश्वर नाईक, भोला सिंह, डा. सुकान्त मजुमदार, विनोद कुमार सोनकर और राजवीर सिंह के प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री डा. भागवत कराड ने कहा कि सरकार और प्रवर्तन एजेंसियों ने अनधिकृत योजनाएं चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है।

सदस्यों ने पूछा था कि क्या देश के विभिन्न हिस्सों में फर्मों/कंपनियों/व्यक्तियों द्वारा आम लोगों को ठगने वाली कई पोंजी योजनाएं सरकार के संज्ञान में आई हैं और इसका ब्योरा क्या है?

वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2019 से जून 2022 के दौरान पोंजी योजनाओं से संबंधित 100 मामले दर्ज किये हैं जिसमें 132 कंपनियां/फर्म शामिल हैं और इस संबंध में सीबीआई ने 21 लोगों को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले 3 वर्षों और चालू वर्ष के दौरान धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (पीएमएलए) के उपबंधों के तहत पोंजी योजनाओं से संबंधित 87 मामलों की जांच की और इस संबंध में 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।

मंत्री ने कहा कि गंभीर धोखाधड़ी अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ) ने सूचित किया है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान उसे कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय से 9 मामलों की जांच सौंपी गई है जिसमें 85 कंपनियां शामिल हैं और जो कथित तौर पर कपटपूर्ण तरीके से चिटफंड/बहुस्तरीय मार्केटिंग से जुड़ी पोंजी गतिविधियों में लिप्त थी। इस संबंध में एसएफआईओ द्वारा किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की गई है।

मंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के सचेत पोर्टल को जमा एवं विभिन्न निवेश योजनाओं के लिये एकत्र किए गए धन की अदायगी न होने के संबंध में 1540 शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

उन्होंने बताया कि भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पिछले 4 वर्षों के दौरान 29 अपंजीकृत सामूहिक निवेश योजनाओं वाली संस्थाओं के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किए हैं।

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