देश की खबरें | कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे ‘आप’ विधायक विधानसभा से निलंबित
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की नवगठित आठवीं विधानसभा के पहले बजट सत्र के अंतिम दिन कानून एवं न्याय मंत्री कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप)के 12 विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
नयी दिल्ली, दो अप्रैल दिल्ली की नवगठित आठवीं विधानसभा के पहले बजट सत्र के अंतिम दिन कानून एवं न्याय मंत्री कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप)के 12 विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
दिल्ली की अदालत ने मंगलवार को 2020 के दिल्ली दंगों में मिश्रा की कथित भूमिका को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसके एक दिन बाद ‘आप’ विधायकों ने प्रदर्शन किया।
आप विधायक तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए सदन में विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने आए गए, जिसके बाद अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 12 विपक्षी विधायकों- आतिशी, कुलदीप कुमार, संजीव झा, मुकेश अहलावत, सुरेंद्र कुमार, जरनैल सिंह, आले मोहम्मद इकबाल, अनिल झा, विशेष रवि, सोम दत्त, सही राम और प्रेम चौहान को निलंबित कर दिया।
सदन में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मिश्रा को बचाने का आरोप लगाया।
उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘दंगों के सभी आरोपी जेल में हैं। कपिल मिश्रा सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं? हम उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा उन्हें बचा रही है।’’
‘आप’ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ‘‘ दिल्ली के दंगों में 53 लोगों की मौत के जिम्मेदार कपिल मिश्रा के खिलाफ अदालत ने प्राथमिकी का आदेश दिया है। लेकिन दिल्ली पुलिस और भाजपा सरकार कपिल मिश्रा को बचाने का काम कर रही है और मुख्यमंत्री कपिल मिश्रा से इस्तीफा नहीं ले रहीं।’’
विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता ने विधानसभा सचिव को यह सत्यापित करने का निर्देश दिया कि क्या निलंबित विधायक परिसर में ही हैं और क्या निलंबन आदेश के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।
आठवीं विधानसभा के प्रथम सत्र के दौरान तीन मार्च को अध्यक्ष गुप्ता ने आदेश दिया था कि किसी भी विधायक को यदि निलंबित किया जाता है या मार्शल के माध्यम से बाहर किया जाता है तो उसे विधानसभा परिसर पूरी तरह से खाली करना होगा।
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