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न्यायालय के एकल न्यायाधीश की पीठ सात साल तक की सजा वाले मामलों में जमानत याचिकाओं पर करेगी सुनवाई

उच्चतम न्यायालय के इतिहास में यह पहला अवसर है जब मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी एकल न्यायाधीश को सौंपी जा रही है। अभी तक शीर्ष अदालत में किसी भी मामले की सुनवाई कम से कम दो या तीन न्यायाधीशों की पीठ करती आ रही थी।

न्यायालय के एकल न्यायाधीश की पीठ सात साल तक की सजा वाले मामलों में जमानत याचिकाओं पर करेगी सुनवाई
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नयी दिल्ली,11 मई उच्चतम न्यायालय के एकल न्यायाधीश की पीठ 13 मई से अग्रिम जमानत और जमानत के ऐसे मामलों की सुनवाई करेगी जिनमें दोषी पाये जाने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है। यह पीठ मुकदमों के स्थानांतरण की याचिकाओं की भी सुनवाई करेगी।

उच्चतम न्यायालय के इतिहास में यह पहला अवसर है जब मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी एकल न्यायाधीश को सौंपी जा रही है। अभी तक शीर्ष अदालत में किसी भी मामले की सुनवाई कम से कम दो या तीन न्यायाधीशों की पीठ करती आ रही थी।

शीर्ष अदालत में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के इरादे से उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 में पिछले साल सितंबर में कुछ संशोधन किये गये थे जिसके तहत एकल न्यायाधीश सात साल तक की सजा वाले मामलों में अग्रिम जमानत और जमानत की अपीलों पर सुनवाई करेंगे।

शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर सोमवार को अपलोड की गयी नोटिस में यह जानकारी दी गयी। नोटिस के अनुसार अन्य संशोधनों के अलावा सक्षम प्राधिकार ने प्रावधान किया है कि चुनिन्दा श्रेणी के मामलों को प्रधान न्यायाधीश द्वारा नामित एकल न्यायाधीश अंतिम रूप से सुनवाई करके उनका निस्तारण करेंगे।

नोटिस में कहा गया है कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों के मामले में दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 437, 438 या धारा 439 के तहत पारित आदेश के खिलाफ जमानत आवेदन या अग्रिम जमानत आवेदन खारिज करने के मामले में दायर विशेष अनुमति याचिकाओं की सुनवाई एकल न्यायाधीश करेंगे।

इसी तरह, एकल न्यायाधीश दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 406 के तहत मुकदमों के स्थानांतरण और दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 25 के तहत तात्कालिक स्वरूप के मुकदमों के स्थानांतरण के आवेदनो की भी सुनवाई करेंगे।

नोटिस में कहा गया है कि इस तरह के मामले 13 मई से एकल न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध होंगे। इस संबंध में पिछले साल 17 सितंबर को राजपत्र में एक अधिसूचना जारी की गयी थी जिसके माध्यम से शीर्ष अदालत ने अपने 2013 के नियमों में संशोधन किये थे।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय के नियम, 2013 और पुराने नियमों के अनुसार प्रधान न्यायाधीश को ग्रीष्मावकाश या शरद अवकाश के दौरान तात्कालिक स्वरूप के सारे मामलों की सुनवाई के लिए एक या अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार था।

अनूप

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(The above story first appeared on LatestLY on May 11, 2020 06:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).