देश की खबरें | श्रीलंका के बौद्ध मंदिर परिसर में अशोक स्तंभ की प्रतिकृति स्थापित

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नयी दिल्ली, 23 जुलाई भारत के सम्राट अशोक की श्रीलंका के प्रति ‘‘अभूतपूर्व सेवा’’ के सम्मान में, वहां के एक प्रमुख बौद्ध मंदिर के परिसर में अशोक स्तंभ की प्रतिकृति स्थापित की गई है।

श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय संस्कृति मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि यह प्रतिकृति श्रीलंका के वास्कादुवा श्री सुभूति विहार के पवित्र परिसर में लगाई गई है और 21 जुलाई को इसका अनावरण किया गया।

इस अवसर पर भारत के उच्चायुक्त संतोष झा, मंदिर के मुख्य अधिष्ठाता वास्कादुवे महिंदावंस महानायक थेरो, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के उप महासचिव डामेंडा पोराजे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

महानायक थेरो ने कहा, ‘‘यह स्तंभ सम्राट अशोक द्वारा श्रीलंका के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों को सम्मानित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।’’

इस प्रतिकृति के लिए शिलान्यास 28 जनवरी, 2024 को उच्चायुक्त संतोष झा और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्टसे खेनसुर जांगचुप छोडेन रिनपोछे ने किया था।

झा ने अपने संबोधन में कहा, “इस पहल ने भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और सुदृढ़ किया है।”

उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ने सितंबर 2020 में दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक संबंधों को प्रोत्साहित करने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर की विशेष सहायता राशि की घोषणा की थी, जिसके अंतर्गत श्रीलंका के लगभग 10,000 बौद्ध मठों और पीरिवेना (मठीय विद्यालयों) को सौर ऊर्जा से नि:शुल्क रोशन करने की परियोजना भी शामिल है।

महानायक थेरो ने कहा, ‘‘सम्राट अशोक के प्रयासों से श्रीलंका को बौद्ध धर्म जैसा अद्भुत आध्यात्मिक मार्ग प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने पुत्र अरहंत महेन्द्र और पुत्री अरहंती संघमित्रा को बौद्ध संघ को समर्पित किया, जिन्होंने श्रीलंका में बुद्ध धर्म की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। लेकिन उनका योगदान प्रायः भुला दिया जाता है। हम इस स्तंभ के माध्यम से उस महान सम्राट के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते थे।’’

डामेंडा पोराजे ने बताया कि वास्कादुवा श्री सुभूति विहार को इस स्तंभ के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह मंदिर ‘‘भगवान बुद्ध के कपिलवस्तु अवशेषों’’ का पवित्र स्थल है।

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