नयी दिल्ली, 24 फरवरी अमेरिका के एक कश्मीरी पंडित संगठन ने घाटी में आतंकवादियों द्वारा की जा रही लक्षित हत्याओं के मद्देनजर कश्मीरी पंडितों की कश्मीर से बाहर तैनाती की मांग का समर्थन किया है।
कश्मीरी पंडित फाउंडेशन (केएचएफ) ने आरोप लगाया है कि पंडितों के मुद्दों का देशभर में राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उसने केंद्र सरकार से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की समस्याओं के समाधान के लिए उनका प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘पनून कश्मीर’ से वार्ता शुरू करने की अपील की।
फाउंडेशन ने अपने विशेष सत्र में पारित प्रस्ताव में कहा है, ‘‘ कश्मीर में (आतंकवादियों द्वारा) चुन-चुन की जा रही हत्याओं का सिलसिला दर्शाता है कि सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पायी है.... छिटपुट तरीके से जबरन इस छोटे समुदाय को वापस ले जाना, जैसा कि प्रधानमंत्री के विशेष (रोजगार) पैकेज में किया जा रहा है, घातक प्रयोग साबित होने वाला है।’’
प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत घाटी में जिन कश्मीरी पंडितों को नौकरी दी गयी थी, उनमें से सैंकड़ों लोग आतंकवादियों द्वारा राहुल भट की उनके दफ्तर में हत्या कर दिये जाने के बाद जम्मू चले गये। जम्मू में उनमें से कई हड़ताल पर बैठे हैं और मांग कर रहे हैं कि उन्हें घाटी के बाहर भेजा जाए।
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘ प्रधानमंत्री पैकेज , जिसे सरकार पुनर्वास पैकेज कहती है, के तहत नौकरी पाने वालों का वर्तमान आंदोलन साबित करता है कि पुनर्वास का यह प्रयोग भी विफल हो गया है। सरकार यह पेश करना चाहती है कि घाटी में कुछ हजार कश्मीरी पंडितों को वापस भेजकर उसने हमारा पुनर्वास कर दिया है।’’
सरकार के ‘नया कश्मीर’ नारे पर सवाल उठाते हुए फाउंडेशन ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पैकेज के कर्मचारी प्रशासन के हाथों ‘ गंभीर एवं सुनियोजित मानवाधिकार उल्लंघन’ का सामना कर रहे हैं क्योंकि प्रशासन ने जबरन उनकी तनख्वाह रोक दी है ।
केएचएफ ने कहा, ‘‘ हम तबतक के लिए कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के जीवन जीने के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें तत्काल जम्मू स्थानांतरित करने की मांग करते हैं जबतक इस समुदाय की आकांक्षाओं के हिसाब से एक समग्र पुनर्वास योजना पर गौर नहीं किया जाता है।’’
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