देश की खबरें | सांसद आदर्श ग्राम योजना के गांवों में 56.57 प्रतिशत परिवारों को नल से जल कनेक्शन उपलब्ध : सरकार ने समिति को बताया
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नयी दिल्ली, 14 फरवरी सरकार ने संसद की एक समिति को बताया कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के दायरे में आने वाले गांवों में अब तब 17.24 लाख ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है जो 56.57 प्रतिशत कवरेज को दर्शता है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद परबतभाई सवाभाई पटेल की अध्यक्षता वाली जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति के 16वें प्रतिवेदन में अंतर्विष्ट सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को लोकसभा में पेश की गई थी।
जल संसाधन विभाग ने संसदीय समिति को बताया कि जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में सांसद आदर्श ग्राम योजना वाले गांवों में नल से जल कनेक्शन उपलब्ध कराना प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से वार्षिक कार्य योजना की बैठकों के दौरान इस योजना से जुड़े गांवों में नल से जल कनेक्शन में तेजी लाने का अनुरोध किया गया है।
इसमें कहा गया है कि इसके कवरेज को प्राथमिकता देने के लिये ग्रामीण विकास मंत्रालय से यह भी अनुरोध किया गया है कि बैठकों में नल से जल कनेक्शन के लिये राज्यों के साथ मामला उठाएं और वर्ष 2024 से पहले ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को हासिल करने के काम में तेजी लाएं।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘सांसद आदर्श ग्राम योजना के दायरे में आने वाले गांवों में अब तब 17.24 लाख (56.57 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।’’
समिति ने पहले अपनी सिफारिश में कहा था कि सांसद आदर्श ग्राम योजना अक्टूबर 2014 में शुरू की गई थी जिसमें सभी सांसदों को प्रत्येक वर्ष एक गांव को ‘आदर्श ग्राम’ बनाने के लिये गोद लेना होता है। सरकार ने राज्य सरकारों से विभिन्न चालू योजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन में सांसद आदर्श ग्राम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिये गए गांवों की दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी क्योंकि विकास योजनाओं , विशेष रूप से जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के कार्यान्वयन में सांसद आदर्श ग्राम योजना के गांवों के लिये कोई प्राथमिकता नहीं दी गई है और इसके परिणामस्वरूप ऐसे गांवों का वादे के अनुसार समग्र विकास नहीं हो रहा है।
संसदीय समिति ने इसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने और तीन महीने के भीतर इस संबंध में की गई कार्रवाई से अवगत कराने को कहा था।
समिति ने राज्यों को जारी किए गए पत्र का जिक्र किया जिसमें बुनियादी ढांचे को न्यूनतम नुकसान के साथ ग्रामीण जल योजनाओं को शुरू करने और जल आपूर्ति प्रणालियों के लिये पाइपलाइन बिछाते समय किए गए नुकसान की स्थिति में सड़कों/राजमार्गो को तुरंत बहाल करने की सलाह दी गई है।
इसमें कहा गया है कि समिति विभाग के ध्यान में पुन: यह बात लाना चाहती है कि कई राज्यों में अक्सर पाइपलाइन बिछाने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों की बहाली या मरम्मत नहीं की जाती है और उन्हें मिट्टी से भर दिया जाता है या खुला छोड़ दिया जाता है।
ऐसे में समिति इस बात को दोहराती है कि विभाग इस मामले पर गंभीरता से ध्यान दे और दैनिक आधार पर प्रयोग की जाने वाली ग्राम सड़कों सहित क्षतिग्रस्त सड़कों की पाइपलाइन बिछाने के तुरंत बाद मरम्मत की जाए।
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