उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग नियमित रूप से यूक्रेन के सैनिकों को वापस लड़ने में मदद के लिए सहयोगियों की प्रशंसा करते हैं। लेकिन जब वह ऐसा करते हैं, तो एक संगठन के रूप में नाटो के बारे में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से सदस्य देशों के बारे में बात कर रहे होते हैं।
लिथुयानिया की राजधानी में नाटो का शिखर सम्मेलन मंगलवार को शुरू हुआ। नाटो यूक्रेन की मदद के लिए क्या-क्या कदम उठा रहा है, इस पर एक नजर डालते हैं।
नाटो केवल गैर-घातक संसाधनों की आपूर्ति का पक्षधर है:
यह 31 सदस्यीय सैन्य सुरक्षा संगठन यूक्रेन को केवल गैर-घातक समर्थन मुहैया कराता है जिसमें ईंधन, राशन, चिकित्सा आपूर्ति, बख्तरबंद, सर्दियों में पहनने की वर्दी और बारूदी सुरंगों, रासायनिक तथा जैविक खतरों एवं ड्रोन से निपटने वाले उपकरण शामिल हैं।
नाटो आम-सहमति से निर्णय लेता है। उसके सभी देश हथियार भेजने के लिए सहमत नहीं होते। यह संगठन पाबंदियां नहीं लगाता, लेकिन इसके कुछ सदस्य राष्ट्र यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे संगठनों के माध्यम से ऐसा करते हैं।
यूक्रेन की भविष्य में सदस्यता:
नाटो यूक्रेन के सशस्त्र बलों की मदद कर रहा है ताकि वे आधुनिक बनें और सोवियतकालीन उपकरणों को छोड़ नये उपकरण अपनाएं। नाटो यूक्रेन के रक्षा और सुरक्षा संस्थानों को मजबूत करने में भी मदद कर रहा है।
यह सहायता इस तरह से भी की जा रही है कि भविष्य में युद्ध समाप्त होने के बाद यूक्रेन कभी नाटो में शामिल हो सके। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके समकक्षों ने वादा किया है कि यूक्रेन को अंतत: सदस्यता मिलेगी। ये सभी राष्ट्रप्रमुख लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में शिखर सम्मेलन के लिए मिल रहे हैं।
क्षेत्र में नाटो की तैयारी:
रूस द्वारा 2021 में यूक्रेन के आसपास अपने सैनिकों को भेजने की शुरुआत करने के बाद से नाटो का प्राथमिक लक्ष्य अपने स्वयं के क्षेत्र को विशेष रूप से इसके पूर्वी हिस्से के देशों को मजबूत करना है।
रूस-यूक्रेन युद्ध को 17 महीने हो गये हैं और नाटो चाहता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन क्षेत्र में पश्चिम के मित्र देशों तक संघर्ष का विस्तार करने से ठिठकें।
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