जरुरी जानकारी | अरुणाचल प्रदेश में 13 जलविद्युत परियोजनाओं से 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा: आर के सिंह
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नयी दिल्ली, 28 नवंबर केंद्रीय बिजली मंत्री आर. के. सिंह ने कहा कि 13,000 मेगावाट की कुल उत्पादन क्षमता वाली 13 निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाएं अरुणाचल प्रदेश में करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाएंगी।
विद्युत मंत्रालय के एक बयान के अनुसार सिंह ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश/असम में स्थित 2,000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना का मुआयना किया।
मंत्री ने असम के गेरुकामुख में सुबनसिरी परियोजना निर्माण स्थलों, अर्थात बांध, संरचनाओं और ‘डायवर्जन’ सुरंगों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जारी निर्माण गतिविधियों का जाय़जा लिया। उन्हें अभी तक हुई प्रगति के बारे में जानकारी भी दी गई।
मंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सुबनसिरी के अलावा 13 परियोजनाओं के लिए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इससे अरुणाचल में 13,000 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता उत्पन्न होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इन परियोजनाओं से राज्य में करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा। इससे प्रति व्यक्ति आय चौगुनी हो जाएगी और देश को स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी। ’’
सिंह ने कहा कि इसी तरह जम्मू-कश्मीर में पांच जल विद्युत परियोजनाओं पर काम जारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में भी हमारी जलविद्युत क्षमता आगे बढ़ रही है और बहुत सारा निवेश आ रहा है।’’
परियोजना का मुआयना करने के बाद पर संतोष व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं का महत्व बढ़ गया है क्योंकि जलविद्युत के बिना चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा संभव नहीं है।
सिंह ने कहा, ‘‘मैंने सभी विवरणों पर गौर किया और मेरा मानना है कि कुल मिलाकर परियोजना सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हमें नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने और उत्सर्जन कम करने की आवश्यकता है। इसलिए भी जलविद्युत परियोजनाओं का महत्व बढ़ गया है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे पास नवीकरणीय ऊर्जा के साथ सौर और पवन भी हैं, तब भी जलविद्युत के बिना चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा संभव नहीं है। हमारी जलविद्युत क्षमता बढ़ रही है।’’
बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने कहा, ‘‘ आज हमारी जलविद्युत क्षमता 47,000 मेगावाट है, जो हमारी उपलब्ध जलविद्युत क्षमता का 35 प्रतिशत है। हालांकि विकसित देशों ने अपनी उपलब्ध जलविद्युत क्षमता का करीब 70 प्रतिशत से 80 प्रतिशत इस्तेमाल किया है।’’
सिंह ने कहा, ‘‘ पिछले वर्ष की तुलना में अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2023 में हमारी बिजली की मांग 20 प्रतिशत बढ़ी। हमारी मांग इसी दर से बढ़ती रहेगी, क्योंकि नीति आयोग के अनुसार हमारी अर्थव्यवस्था अगले दो दशकों तक 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी। 2013 में अधिकतम मांग करीब 1.35 लाख मेगावाट थी, जबकि आज यह करीब 2.31 लाख मेगावाट है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘2030 तक हमारी बिजली की मांग दोगुनी हो जाएगी। आज हमारी कुल खपत 1,600 अरब यूनिट है, जो लगभग 3,000 अरब यूनिट हो जाएगी।’’
मंत्री ने कहा कि हालांकि अब भी विकसित देशों की तुलना में बिजली की खपत कम है। यूरोप की प्रति व्यक्ति बिजली खपत आज हमसे करीब तीन गुना अधिक है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी चुनौती बिजली मांग में वृद्धि के साथ-साथ उतनी ही तेजी से बिजली क्षमता बढ़ाने की है।’’
सिंह ने कहा कि पहले हमारे देश में बिजली की कमी थी, लेकिन सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 1.9 लाख मेगावाट बिजली क्षमता बढ़ाई है। अब हमारे पास पर्याप्त बिजली है और हम बांग्लादेश तथा नेपाल जैसे पड़ोसी देशों को भी इसका निर्यात कर रहे हैं।
सिंह ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा में हमारी निर्माणाधीन क्षमता करीब 70,000 मेगावाट है, जबकि ताप विद्युत (थर्मल) में यह 27,000 मेगावाट है।
उन्होंने कहा कि देश 2030 की बिजली मांग को पूरा करने के लिए निर्माणाधीन ताप विद्युत क्षमता में 53,000 मेगावाट और जोड़ने जा रहा है।
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