जरुरी जानकारी | गरीबों, प्रवासी श्रमिकों के लिये मुफ्त अनाज योजना को तीन माह बढ़ाने की 10 राज्यों ने की मांग: पासवान

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दस से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने गरीबों व प्रवासियों को मुफ्त खाद्यान्न तथा दाल वितरण योजना की अवधि तीन महीने बढ़ाये जाने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 18 जून दस से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने गरीबों व प्रवासियों को मुफ्त खाद्यान्न तथा दाल वितरण योजना की अवधि तीन महीने बढ़ाये जाने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी।

प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना (पीएमजीएवाई) के तहत, सरकार राशन दुकानों के जरिये अप्रैल-जून के लिये प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम खाद्यान्न और प्रति परिवार एक किलोग्राम दाल मुफ्त में उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही आठ करोड़ वैसे प्रवासियों को भी मुफ्त अनाज और दाल उपलब्ध कराई जा रही है, जिनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है। यह कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन से प्रभावित लोगों की मदद के लिये घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज का हिस्सा है।

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पासवान ने संवाददाताओं से कहा, "हमें इन दो योजनाओं के विस्तार के लिये 10 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं। हम मामले पर विचार कर रहे हैं और उसके आधार पर ही मंत्रिमंडल को प्रस्ताव आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जायेगा।"

उन्होंने कहा कि असम, कर्नाटक, पुडुचेरी, तमिलनाडु, राजस्थान, पंजाब, केरल, मिजोरम, छत्तीसगढ़ उन राज्यों में हैं, जिन्होंने योजना अवधि विस्तार की मांग की है।

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पासवान ने कहा कि केंद्रीय भंडार में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है। उन्होंने राज्य सरकारों से मानसून से पहले अग्रिम में अनाज उठाने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को समय पर वितरण सुनिश्चित करने की अपील की है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डी वी प्रसाद ने कहा कि पीएमजीएवाई के तहत प्रवासियों को मुफ्त अनाज का वितरण अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा कि वितरण सभी राज्यों में जारी है, लेकिन बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में थोड़ा धीमा है।

इससे पहले, पासवान ने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष गेहूं खरीद रिकॉर्ड स्तर पर है। उन्होंने कहा कि भंडारण के बारे में भी चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि अभी भंडारण क्षमता आठ करोड़ टन से अधिक अनाज रखने की है, जबकि वार्षिक आवश्यकता छह करोड़ टन की है।

उन्होंने कहा कि भंडारण की चिंता केवल पंजाब और हरियाणा में है, जहां से अधिकतम अनाज की खरीद की जाती है, लेकिन यह एक छोटी अवधि की समस्या है।

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