जरुरी जानकारी | सरसों, सीपीओ में सुधार, अधिकांश तेल तिलहन कीमतों में गिरावट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वायदा कारोबार में कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और सोयाबीन रिफाइंड के भाव टूटने से शनिवार को स्थानीय तेल तिलहन बाजार में सोयाबीन डीगम और पामोलीन दिल्ली एवं पामोलीन कांडला तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई जबकि सहकारी संस्था नाफेड द्वारा कम भाव पर सरसों की बिकवाली की बोली को निरस्त करने की घटनाओं के बीच सरसों दाना सहित उसके तेल कीमतों में सुधार आया।

नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर वायदा कारोबार में कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और सोयाबीन रिफाइंड के भाव टूटने से शनिवार को स्थानीय तेल तिलहन बाजार में सोयाबीन डीगम और पामोलीन दिल्ली एवं पामोलीन कांडला तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई जबकि सहकारी संस्था नाफेड द्वारा कम भाव पर सरसों की बिकवाली की बोली को निरस्त करने की घटनाओं के बीच सरसों दाना सहित उसके तेल कीमतों में सुधार आया।

बाजार सूत्रों ने कहा कि किसानों के पास बचे भारी स्टॉक के बीच सस्ते आयात के कारण मूंगफली की मांग प्रभावित हुई है जिससे मूंगफली तिलहन फसल सहित इसके तेल कीमतों में गिरावट आई।

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उन्होंने कहा कि वायदा कारोबार में जान जानबूझकर सीपीओ और सोयाबीन रिफाइंड के भाव कम बोले जा रहे हैं ताकि त्यौहार के मौसम में देश में कम आयात हो और मांग बढ़ने पर कुछ व्यापारी बढ़े हुए दाम पर अपने माल को बाजार में बेच सकें। उन्होंने कहा कि सूरजमुखी तेल के मामले में इसी तरह का अनुभव पहले रहा है जब हफ्ता भर पहले इसके स्टॉक की कमी होने के बाद इसे ऊंचे दामों में बाजार में बेचा गया था।

उन्होंने कहा कि देश में त्यौहार के मौसम में आयातित तेलों का स्टॉक काफी कम है। 26 सितंबर को कांडला बंदरगाह पर सीपीओ का स्टॉक 48,000 टन ही रह गया था जबकि कि इसी तारीख को सोयाबीन डीगम का स्टॉक 98,000 टन था। जुलाई के महीने में जो आयात चार लाख 84 हजार टन का हुआ था वह अक्टूबर में घटकर तीन लाख 20 हजार टन रह जाने की संभावना है।

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सूत्रों ने कहा कि ऐसे में त्यौहारी मांग बढ़ने पर कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियां महंगे भाव पर तेल बेचने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि स्टॉक कम है। सीपीओ का आयात आने में लगभग 15-20 दिन का समय लगता है और सोयाबीन डीगम के आयात को देश के बंदरगाह पर पहुंचने में कम से कम 45-50 दिन लगते हैं। ऐसे में सरकार को वायदा कारोबार के कामकाज पर उसमें सट्टेबाजी को रोकने के दीर्घकालिक उपाय करना चाहिये क्योंकि इससे तेल उद्योग, किसान और उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है।

तेल तिलहन बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन - 5,525 - 5,575 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली दाना - 4,825- 4,875 रुपये।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 12,200 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 1,820 - 1,880 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,705 - 1,855 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,825 - 1,935 रुपये प्रति टिन।

तिल मिल डिलिवरी तेल- 11,000 - 15,000 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,750 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,600 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम- 8,650 रुपये।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,720 रुपये।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,000 रुपये।

पामोलीन आरबीडी दिल्ली- 9,050 रुपये।

पामोलीन कांडला- 8,300 रुपये (बिना जीएसटी के)।

सोयाबीन तिलहन मिल डिलिवरी भाव 3,765- 3,790 लूज में 3,615 -- 3,665 रुपये।

मक्का खल (सरिस्का) - 3,500 रुपये

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