जरुरी जानकारी | कीटनाशक रसायन उद्योग संगठन पीएमएफआई ने 27 कीटनाशकों पर पाबंदी लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया

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नयी दिल्ली, नौ जून कीटनाशक कंपनियों के संगठन पीएमएफएआई ने मंगलवार को देश में 27 कीटनाशक रसायनाों के काराोबार पर पाबंदी लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया ।

संगठन का कहना है कि इससे 6,000 करोड़ मूल्य का कारोबार खत्म हो जाएगा, किसानों के लिए कीटनाशक महंगे हो जाएंग, भारत से कीटनाशकों का निर्यात प्रभावित होगा और इसका लाभ चीन जैसे देशों की कंपनियों को होगा। इतना ही नहीं किसानों के हित प्रभावित होंगे क्योंकि जो विकल्प हैं, वो चार गुना महंगे हैं।

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एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को वीडिया कांफ्रेस के जरिए पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि पर्यावरण से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों पर मधुमक्खी की हानि और कैंसर आदि कहा हौवा खड़ा कर कीटनाशक उद्योग पर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने हाल ही में गजट अधिसूचना का मसौदा जारी किया जिसमें 27 प्रकार के कीटनाशक रसायनों के कारोबार पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

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इस बारे में संबंधित पक्षों से अगले 45 दिनों के भीतर प्रतिक्रिया मांगी गयी है।

पेस्टिसाइड मैनुफैक्चरर्स एंड फार्मुलेटर्स एसोसएिशन ऑफ इंडिया (पीएमएफएआई) के अध्यक्ष प्रदीप दवे ने वीडियो कांफ्रेन्स के जरिये संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम इस मामले में उच्च अधिकार प्राप्त वैज्ञानिकों की समिति से जांच चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा कि 27 कीटनाशकों पर पाबंदी का प्रस्ताव मेक इन इंडिया और आत्म निर्भर भारत की भावना तथा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के मिशन के खिलाफ है।

दवे ने कहा, ‘‘इन 27 जेनेरिक कीटनाशकों का कुल बाजार 6,000 करोड़ रुपये का है। इसमें से 4,000 करोड़ रुपये घरेलू बिक्री और 2,000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। हम पूरे कारोबार से हाथ धो बैठेंगे।’’

घरेलू कीटनाशक उद्योग का बाजार 40,000 करोड़ रपये का हैं इसमें से करीब 18,000 करोड़ रुपये की घरेलू बिक्री है।

दवे ने कहा कि जेनेरिक कीटनाशकों का वैश्विक बाजार 30,000 करोड़ रुपये का है और इस पर पूरी तरह से चीन का कब्जा हो जाएगा। उन्होंने तैयार कृषि औषधियों पर कम से कम पंद्रह प्रतिशत की दर से आयात शुल्क लगाने की भी मांग की।

प्रमुख कंपनी यूपीएल लि. के चेरमैन राजू श्रॉफ ने कहा कि देश विभिन्न कृषि खाद्य पदार्थों का प्रमुख उत्पादक देश है लेकिन अमेरिका समेत कई बड़े देशों की तुलना में कीटनाशकों की खपत कम है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण से जुड़े गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) कीटनाशक उद्योग के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं और लोगों तथा संबद्ध पक्षों को गुमराह कर रहे हैं।

श्रॉफ ने आरोप लगाया कि इन एनजीओ को विदेशी एजेंसियों से पैसा मिलता है ओर वे भारतीय किसानों तथा घरेलू उद्योग के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उद्योगों की चिंता की जांच आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के वैज्ञानिकों द्वारा की जानी चाहिए।

श्रॉफ ने कहा कि अगर इन 27 कीटनाशकों पर पाबंदी लगायी जाती है तो इसका कृषि उपज, खेती की लागत और किसानों की आय पर असर पड़ेगा।

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