US Tariff: 90 दिन की अमेरिकी टैरिफ राहत से अधिक सस्टेनेबल व्यापार समझौते होंगे; विशेषज्ञ
अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ फ्रंट पर अस्थायी राहत ने व्यवसायों और भारत को सप्लाई चेन को स्थिर और संचालन को अनुकूलित करने की सुविधा दी है. उद्योग विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि इससे नीति निर्माताओं को अधिक सस्टेनेबल व्यापार समझौतों की दिशा में काम करने का अवसर भी मिला है.
नई दिल्ली, 10 अप्रैल : अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ फ्रंट पर अस्थायी राहत ने व्यवसायों और भारत को सप्लाई चेन को स्थिर और संचालन को अनुकूलित करने की सुविधा दी है. उद्योग विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि इससे नीति निर्माताओं को अधिक सस्टेनेबल व्यापार समझौतों की दिशा में काम करने का अवसर भी मिला है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन व्यापारिक साझेदार देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ में 90 दिनों के लिए 10 प्रतिशत की कम दर की घोषणा की है, जिन्होंने अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाकर जवाबी कार्रवाई नहीं की है, जैसे भारत. वहीं, जवाबी कार्रवाई करने के लिए चीन पर शुल्क को बढ़ाकर 125 प्रतिशत कर दिया गया है. यह भी पढ़ें : संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जूली बिशप भूकंप के बाद म्यांमा की यात्रा पर
एसईएमआई आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चांडक ने कहा, "भारत और कई दूसरे देशों के लिए टैरिफ पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का 90 दिवसीय विराम एक मौलिक नीतिगत बदलाव के बजाय 'रणनीति को फिर से तैयार करने' को दर्शाता है. यह अमेरिकी उपभोक्ताओं और वैश्विक भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से एक स्वागत योग्य विकास है."
उन्होंने कहा कि इस रोक से वैश्विक व्यापार की गतिशीलता का दोबारा मूल्यांकन का रास्ता खुल गया है, लेकिन अधिकांश अमेरिकी आयातों पर मौजूदा 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ और 90 दिनों के बाद आने वाले टैरिफ के कारण तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है. देश-विशिष्ट टैरिफ लगाने का कदम वैश्विक व्यापार परिदृश्य के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण विकास है. बीडीओ इंडिया के टैक्स और नियामक सेवाओं के पार्टनर प्रशांत भोजवानी ने कहा, "इसका प्रभाव कर से परे है और इससे सप्लाई चेन, बिजनेस मॉडल में व्यवधान पैदा हो सकता है. संभावित रूप से मौजूदा निवेश और व्यापार योजनाओं में रुकावट भी आ सकती है."
उन्होंने कहा, "अल्पावधि में, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मंदी की संभावना हो सकती है, क्योंकि बढ़ते 'कंज्यूमर प्राइस' मांग और उपभोग पैटर्न को प्रभावित करती हैं. इस संदर्भ में, व्यवसायों को लागत दक्षता बनाने के लिए सप्लाई चेन और व्यापार मॉडल का दोबारा मूल्यांकन करने और अगर जरूरत हो तो उन्हें फिर से तैयार करने की आवश्यकता होगी." इस बीच, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उभरते व्यापार परिदृश्य के मद्देनजर निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों के साथ चर्चा की. केंद्रीय मंत्री ने वित्त वर्ष 2024-25 में 820 बिलियन डॉलर से अधिक का अब तक का सबसे अधिक निर्यात हासिल करने के लिए निर्यातकों और उद्योग की सराहना की, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 10, 2025 01:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

