विदेश

एक टीम, कई संस्कृतियां: ‘जर्मनी की फुटबॉल टीम बच्चों के लिए प्रेरणा’

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष अनालेना बेयरबॉक ने विश्व कप खेल रही जर्मनी की फुटबॉल टीम की विविधता की सराहना की है.

एक टीम, कई संस्कृतियां: ‘जर्मनी की फुटबॉल टीम बच्चों के लिए प्रेरणा’
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष अनालेना बेयरबॉक ने विश्व कप खेल रही जर्मनी की फुटबॉल टीम की विविधता की सराहना की है.जर्मन नेता अनालेना बेयरबॉक फुटबॉल की एक बड़ी फैन हैं. वह अक्सर बड़े टूर्नामेंटों में जर्मनी की फुटबॉल टीम को चीयर करती नजर आती हैं. पिछले साल यूरोपीय महिला फुटबॉल चैम्पियनशिप के दौरान वह स्विट्जरलैंड में जर्मनी की महिला टीम का समर्थन करते हुए नजर आई थी. अब फीफा विश्व कप खेल रही जर्मनी की फुटबॉल टीम पर उनकी उम्मीदें टिकी हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासभा का मुख्यालय न्यू यॉर्क शहर में हैं और महासभा की अध्यक्ष होने के नाते बेयरबॉक इस टूर्नामेंट को काफी करीब से देख रही हैं. 45 वर्षीय बेयरबॉक ने कहा, "आज हमारी टीम में शानदार विविधता दिखती है, जो नई पीढ़ी के जर्मन खिलाड़ियों का प्रतीक है. हमेशा से ऐसा नहीं था. जब मैंने हाई स्कूल से पढ़ाई पूरी की थी, तब हमारे पास ‘गेराल्ड असामोआ' थे. उस समय वह अफ्रीका में जन्मे खिलाड़ियों में से पहले थे, जिन्होंने आगे चल करत जर्मनी की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के लिए खेला.” उस समय जर्मनी में असामोआ को लेकर काफी चर्चाएं और बहसें हुआ करती थीं.

बेयरबॉक ने हाल में खुले ‘जर्मन हाउस ऑफ सॉकर' में हुए एक सम्मान समारोह में हिस्सा लिया था. वहां बायर्न म्यूनिख की पूर्व फॉरवर्ड स्टार स्ट्राइकर थॉमस म्यूलर और गोलकीपर एन-कात्रिन बेर्गेर को सम्मानित किया गया था. वहां जर्मनी के सबसे सफल फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक रहे थॉमस म्यूलर को भी विशेष सम्मान से नवाजा गया. 36 वर्षीय म्यूलर ने अपने सहज, मिलनसार और लोकप्रिय व्यक्तित्व के जरिए फुटबॉल के जगत में जर्मन फुटबॉल की एक अलग पहचान बनाई. फिलहाल वह फुटबॉल क्लब वैंकूवर व्हाइटकैप्स के लिए खेलते हैं. दूसरी तरफ, बेर्गेर को खिलाड़ी श्रेणी का पुरस्कार मिला. उन्हें उनके जीत के हौसले, दृढ़ संकल्प और कभी हार न मानने वाले रवैये के लिए सम्मानित किया गया.

इसी समारोह के दौरान अनालेना बेयरबॉक ने जर्मनी की फुटबॉल टीमों की तारीफ की. साथ ही, उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणा बताया. उन्होंने हाल के वर्षों में टीम के बेहतर प्रदर्शन की भी तारीफ की.

‘सच्चा जर्मन' कौन?

असामोआ ने साल 2001 में जर्मनी के मुख्य कोच रूडी फ्योलर के नेतृत्व में राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में अपना डेब्यू किया था. उस समय उनके चुनाव का समाज के एक बड़े हिस्से ने स्वागत किया था. हालांकि कुछ लोगों की ओर से उन्हें नस्लभेदी टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा था. इसके साथ ही ‘सच्चा जर्मन' किसे कहा जाए इस पर बहस शुरू हो गई थी. चूंकि, असामोआ का जन्म घाना में हुआ था और वह 12 साल की उम्र में जर्मनी आए थे.

जर्मनी की टीम के लिए खेलने वाले पहले अश्वेत खिलाड़ी एरविन कोस्टेडे थे. लेकिन 2002 और 2006 विश्व कप टीम में असामोआ के चयन से अफ्रीकी विरासत वाले कई खिलाड़ियों के लिए नए रास्ते बने.

राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कोच यूलियान नागेल्समन की मौजूदा विश्व कप टीम में कुल 26 खिलाड़ियों हैं. इसमें से लगभग 11 खिलाड़ी अप्रवासी पृष्ठभूमि वाले परिवारों से आते हैं. हालांकि, इस बार वैसी बहस देखने को नहीं मिली जैसी असामोआ के चयन के समय हुई थी.

फिर भी दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी के कुछ नेता और समर्थक जर्मनी की टीम को "रेनबो स्क्वॉड" कहकर संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं. इसके साथ वह विविधता और भेदभाव-विरोधी प्रयासों की आलोचना करने की कोशिश कर रहे हैं.

यूरो 2024 से पहले जर्मनी के सार्वजनिक प्रसारण संस्थान ‘वेस्टडॉयचररुंडफुंक' के एक सर्वेक्षण में सामने आया कि जब लोगों से पूछा गया कि क्या वह टीम में अधिक श्वेत खिलाड़ियों को देखना चाहते हैं. तब 21 फीसदी लोगों ने ‘हां' में जवाब दिया था. उस समय जर्मनी की राष्ट्रीय टीम के कोच यूलियान और टीम कप्तान ने इस सर्वेक्षण की आलोचना की थी.

मशहूर सितारों से ज्यादा जरूरी है एक बेहतरीन टीम

बेयरबॉक ने कहा, "यह दिखाता है कि नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठाना कितना जरूरी हैं. चूंकि, एक टीम हमेशा अपने समाज का आईना होती है.” उन्होंने कहा कि विश्व कप की टीम जर्मनी की विविधता को दर्शाती है. यह टीम जर्मनी के युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है और साबित करती है, "आप जितनी चाहें, उतनी सफलता हासिल कर सकते हैं. खेल, खासकर फुटबॉल लोगों को जोड़ता है. मैदान पर हर कोई बराबर है, चाहे आप कहीं से भी आए हों, आपके माता-पिता कितना भी कमाते हों या आप कोई भी भाषा बोलते हों. खेल के मैदान में बस एक बात मायने रखती है कि आप गोल करें और टीम के लिए खेलें.”

यही वजह है कि जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री बेयरबॉक को पूरी उम्मीद है कि जर्मनी इस विश्व कप में काफी आगे तक जाएगी. उन्होंने कहा, "हो सकता है कि ज्यादातर लोगों ने इस टीम पर दांव ना लगाया हो, लेकिन हमारी टीम स्पिरिट शानदार है.” उन्होंने आगे कहा, "कई बार मशहूर सितारों वाली टीम से ज्यादा जरूरी होता है, एक बेहतरीन टीम बनना.”

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 19, 2026 07:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).