यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टली; जानिए आखिरी कैसे हुआ करिश्मा? क्या कर रही है भारत सरकार
Nimisha Priya | X

केरल की नर्स निमिषा प्रिया, जिन्हें यमन में हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी, उनकी फांसी फिलहाल टाल दी गई है. यह खबर भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में उन लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आई जो इस इंसाफ की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह फैसला अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे कई डिप्लोमैटिक प्रयास, स्थानीय नेताओं की भूमिका और संवेदनशील बातचीत का नतीजा था.

कैसे टली फांसी?

इस मामले की कूटनीतिक लड़ाई में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं एयरलाइंस कंसल्टेंट और सोशल वर्कर सैमुअल जेरोम बास्करन, जो 2015 में यमन से भारतीयों को निकालने में भी मदद कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि फांसी टालने का फैसला यमन सरकार ने लिया और इसमें मृतक तालाल अब्दो महदी के परिवार की सहमति शामिल नहीं थी.

दरअसल, यमन के अल वसाब क्षेत्र के शासक अब्दुल मलिक अल नहाया ने राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी से मुलाकात की थी. इसके बाद राष्ट्रपति ने फांसी स्थगित करने की मंजूरी दी. इस आदेश के तहत 14 जुलाई को यमन के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने सेंट्रल जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि फांसी की कार्रवाई फिलहाल स्थगित कर दी जाए.

अभी तक माफी नहीं मिली है

सबसे अहम बात यह है कि मृतक तालाल के परिवार ने अभी तक माफ नहीं किया है. बास्करन ने साफ कहा कि निमिषा की जिंदगी की चाबी तालाल के परिवार के पास है. अगर वे माफ कर देते हैं, तभी शरिया कानून के तहत उन्हें माफ किया जा सकता है. उन्होंने कहा, “हमारा अगला और अंतिम प्रयास तालाल के परिवार को समझाकर उनसे माफ़ी दिलवाना है. हमने कुछ उम्मीदें बनाई हैं, लेकिन फिलहाल बातचीत के ज्यादा ब्योरे साझा नहीं किए जा सकते.”

भारत सरकार की भूमिका

भारत सरकार ने भी पिछले कुछ दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए थे. विदेश मंत्रालय ने यमन प्रशासन से समय मांगा था ताकि निमिषा के परिवार को ‘ब्लड मनी’ के ज़रिए समझौते का अवसर मिल सके. यह शरिया कानून के तहत एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें आरोपी पक्ष मुआवजा देकर माफ़ी पा सकता है. भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, यमन के जेल प्रशासन और प्रॉसिक्यूटर ऑफिस से लगातार संपर्क में भारतीय अधिकारी बने हुए हैं.

क्या है ब्लड मनी?

ब्लड मनी यानी खून का मुआवजा, शरिया कानून के तहत एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें मृतक के परिजन अपराधी को माफ कर सकते हैं यदि उन्हें उचित आर्थिक मुआवज़ा मिले. निमिषा प्रिया के परिवार और समर्थक अब इसी रास्ते से उम्मीद की किरण देख रहे हैं.