Indian Flag Torn In US: टेक्सास में भारतीय तिरंगे के अपमान पर बवाल, 6 भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने की कड़ी निंदा, कहा- नफरत और ज़ेनोफोबिया बर्दाश्त नहीं

डालास के उत्तर में स्थित फ्रिस्को शहर पिछले दो दशकों में तेजी से विकसित हुआ है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी परिवार रहते हैं. तकनीक, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय क्षेत्र और अन्य पेशेवर उद्योगों में कार्यरत भारतीय मूल के लोगों की वजह से यह शहर टेक्सास में भारतीय प्रवासी समुदाय का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है.

वॉशिंगटन, 16 जून: अमेरिका के टेक्सास राज्य के फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर एक आव्रजन (इमिग्रेशन) विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय तिरंगे को फाड़े जाने की घटना पर अमेरिकी कांग्रेस के छह भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. सांसदों ने इस घटना की निंदा करते हुए भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ एकजुटता व्यक्त की और बढ़ती भारत-विरोधी बयानबाजी तथा ज़ेनोफोबिया पर चिंता जताई.

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति, एमी बेरा, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि प्रदर्शन के दौरान भारतीय ध्वज को फाड़ना और भारत-विरोधी नारे लगाना बेहद चिंताजनक है. यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.

सांसदों ने कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान, लेकिन नफरत स्वीकार नहीं

संयुक्त बयान में सांसदों ने कहा, "हम सभी अमेरिकियों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का समर्थन करते हैं. लेकिन फ्रिस्को सिटी हॉल के बाहर भारतीय ध्वज को फाड़ने और भारत-विरोधी नफरत फैलाने वाली बयानबाजी की हम कड़ी निंदा करते हैं. इस तरह की घटनाएं भारतीय समुदाय के खिलाफ हिंसा और ज़ेनोफोबिया को बढ़ावा देती हैं."

उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को निशाना बनाकर की गई नफरत, धमकी और डराने-धमकाने वाली गतिविधियों का अमेरिकी समाज में कोई स्थान नहीं है.

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता

सांसदों ने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच सुरक्षा और स्वीकार्यता को लेकर चिंता बढ़ी है.

बयान में कहा गया, "भारतीय-अमेरिकी समुदाय हमारे देश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और उन्हें सुरक्षित तथा सम्मानित महसूस करने का पूरा अधिकार है. जब भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के लोग उत्पीड़न, ज़ेनोफोबिया और नफरत भरे बयानों का सामना कर रहे हैं, तब नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे स्पष्ट रूप से ऐसी नफरत के खिलाफ आवाज उठाएं."

भारतीय-अमेरिकियों के साथ एकजुटता का संदेश

छहों सांसदों ने टेक्सास के फ्रिस्को समेत पूरे अमेरिका में रहने वाले भारतीय-अमेरिकियों के प्रति अपना समर्थन दोहराया.

उन्होंने कहा, "हम फ्रिस्को और देशभर के भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ खड़े हैं. हर व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा के साथ जीने का अधिकार है, बिना किसी डर, उत्पीड़न या भेदभाव के."

अमेरिका में बढ़ता भारतीय-अमेरिकी प्रभाव

ये छह सांसद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक साथ सेवा देने वाले भारतीय मूल के सांसदों का अब तक का सबसे बड़ा समूह हैं. ये नेता अक्सर प्रवासी समुदायों, नागरिक अधिकारों और भारतीय-अमेरिकी समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहे हैं.

वर्तमान में अमेरिका में 50 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं और उन्हें देश के सबसे शिक्षित तथा आर्थिक रूप से सफल समुदायों में गिना जाता है. पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस, राज्य विधानसभाओं, स्थानीय प्रशासन और व्यापार एवं तकनीक क्षेत्र में भारतीय-अमेरिकियों की भागीदारी लगातार बढ़ी है.

फ्रिस्को में बड़ी भारतीय आबादी

डालास के उत्तर में स्थित फ्रिस्को शहर पिछले दो दशकों में तेजी से विकसित हुआ है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी परिवार रहते हैं. तकनीक, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय क्षेत्र और अन्य पेशेवर उद्योगों में कार्यरत भारतीय मूल के लोगों की वजह से यह शहर टेक्सास में भारतीय प्रवासी समुदाय का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है.

Share Now