Israel-Gaza War: 'गाजा में शासन खत्म करो और हथियार डालो'...अरब के मुस्लिम देशों ने हमास को दी चेतावनी
कतर और सऊदी अरब जैसे प्रमुख अरब देशों ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हमास से गाजा में अपना शासन खत्म करने को कहा है. उन्होंने मांग की कि हमास अपने हथियार फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सौंप दे, ताकि इलाके में दशकों से चल रहा संघर्ष खत्म हो सके. यह पहली बार है जब अरब जगत ने एकजुट होकर खुलकर हमास के खिलाफ ऐसा बयान दिया है.
Israel-Gaza War: कतर, सऊदी अरब और मिस्र जैसे बड़े अरब देशों ने पहली बार खुलकर हमास से कहा है कि वह गाजा पट्टी में अपना शासन खत्म करे और अपने सारे हथियार फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सौंप दे. इन देशों का मकसद फिलिस्तीन में चल रही भयानक लड़ाई को खत्म करना है.
मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक मीटिंग हुई, जिसमें दो-राष्ट्र समाधान (यानी इज़राइल के साथ एक आज़ाद फिलिस्तीनी देश) पर फिर से जान फूंकने की कोशिश की गई. इस मीटिंग में 17 देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ और अरब लीग ने भी एक सात पन्नों के दस्तावेज़ पर सहमति जताई.
इस दस्तावेज़ में क्या कहा गया है?
इस बयान में साफ तौर पर लिखा है, "गाजा में युद्ध खत्म करने के लिए, हमास को गाजा में अपना शासन खत्म करना होगा और अपने हथियार फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सौंपने होंगे. यह एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य के लक्ष्य के तहत होना चाहिए."
यह इतना बड़ा कदम क्यों है?
फ्रांस ने इस बयान को "ऐतिहासिक और अभूतपूर्व" बताया है. ऐसा इसलिए है क्योंकि:
- पहली बार अरब देशों ने हमास की निंदा की: अब तक कई अरब देश हमास का खुलकर विरोध करने से बचते थे, लेकिन अब उन्होंने ऐसा किया है.
- 7 अक्टूबर के हमलों की निंदा: इस बयान में हमास द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर किए गए घातक हमलों की भी निंदा की गई है. यह बहुत बड़ी बात है, क्योंकि UN की जनरल असेंबली ने भी अब तक ऐसा नहीं किया है.
- हमास को सत्ता से हटाने की मांग: अरब देशों का यह कहना कि हमास को फिलिस्तीनी सरकार से बाहर किया जाना चाहिए, एक बहुत बड़ा बदलाव है.
फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि यह दिखाता है कि अरब देश भविष्य में इज़राइल के साथ अपने संबंध सामान्य करना चाहते हैं.
और क्या हुआ इस मीटिंग में?
- इस बयान में यह भी सुझाव दिया गया है कि लड़ाई खत्म होने के बाद गाजा में स्थिरता लाने के लिए विदेशी सेनाओं को तैनात किया जा सकता है.
- दिलचस्प बात यह है कि इस मीटिंग में इज़राइल और उसके सहयोगी अमेरिका ने हिस्सा नहीं लिया.
- इसी दौरान, ब्रिटेन ने घोषणा की कि अगर इज़राइल गाजा में युद्धविराम लागू करने और पर्याप्त मदद आने देने जैसी शर्तें पूरी नहीं करता, तो वह सितंबर में फिलिस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता दे सकता है. फ्रांस भी ऐसा ही कुछ करने का संकेत दे चुका है.
यह युद्ध 21 महीने से ज्यादा समय से चल रहा है. इसकी शुरुआत तब हुई जब हमास ने इज़राइल पर हमला किया, जिसमें 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए थे. इसके जवाब में, इज़राइल ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की, जिसमें हजारों फिलिस्तीनियों की जान चली गई और गाजा का ज़्यादातर हिस्सा तबाह हो गया है.
कुल मिलाकर, यह अरब देशों के रुख में एक बड़ा बदलाव है. वे अब हमास को समस्या का हिस्सा मान रहे हैं और एक स्थायी समाधान के लिए उसे सत्ता से हटाने की मांग कर रहे हैं.