जर्मनी ने बुंडेसवेयर के लिए अपनी पहली सैन्य रणनीति का किया खुलासा

अपने इतिहास में पहली बार, जर्मन सेना ने जर्मनी को भविष्य के खतरों के लिए तैयार करने के मकसद से एक सैन्य रणनीति अपनाई है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अपने इतिहास में पहली बार, जर्मन सेना ने जर्मनी को भविष्य के खतरों के लिए तैयार करने के मकसद से एक सैन्य रणनीति अपनाई है. हालांकि, इस दस्तावेज का एक बड़ा हिस्सा गोपनीय रखा गया है.जर्मनी की सेना ‘बुंडेसवेयर' ने पहली बार आधिकारिक तौर पर अपनी एक सैन्य रणनीति अपनाई है. इसका कारण दुनिया में बढ़ता हुआ खतरा और खतरनाक हालात बताए गए हैं. यह रणनीति तय करती है कि भविष्य में जर्मन सेना का मुख्य लक्ष्य क्या होगा और वह संभावित खतरों का मुकाबला कैसे करेगी.

बर्लिन में नई रणनीति पेश करते समय रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा, "इतिहास के इस दौर में एक सैन्य रणनीति की उतनी जरूरत पहले शायद ही कभी रही हो, जितनी आज है.”

सोशल डेमोक्रेट (एसपीडी) के नेता पिस्टोरियस ने कहा कि दुनिया अब और भी ज्यादा अप्रत्याशित और खतरनाक हो गई है. खासकर तब से, जब रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ा है और अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था पर जबरदस्त दबाव आ गया है.

ज्यादातर रणनीति गोपनीय है

सैन्य रणनीति के मुताबिक, जर्मनी और ट्रांसअटलांटिक की सुरक्षा के लिए रूस "आने वाले समय में सबसे बड़ा और सबसे सीधा खतरा” है. "रूस नाटो के सदस्य देशों पर सैन्य हमले की जमीन तैयार कर रहा है.”

इसके बाद, दस्तावेज में इस बात का विश्लेषण किया गया है कि बुंडेसवेयर को संभावित युद्ध स्थितियों, जैसे कि नाटो क्षेत्र पर रूसी हमले का जवाब कैसे देना चाहिए. हालांकि, इसके बारे में ज्यादा जानकारी गोपनीय रखी गई है. पिस्टोरियस ने कहा, "यह तो जाहिर सी बात है कि हम इन सैन्य योजनाओं को सार्वजनिक नहीं कर सकते. वरना, ऐसा करना पुतिन को सीधे अपनी गुप्त जानकारी भेजने जैसा होगा.”

इस सैन्य रणनीति में जर्मनी के उस पुराने लक्ष्य को फिर से दोहराया गया है, जिसमें सेना का विस्तार करके 2030 के दशक के मध्य तक कुल 4,60,000 सैनिक तैयार करने की बात कही गई है. इनमें से 2,00,000 सैनिक ‘रिजर्व' में होंगे. जर्मनी का लक्ष्य अपनी सेना को यूरोप की सबसे शक्तिशाली पारंपरिक सेना बनाना है, ताकि 2029 तक इसे तेजी से बढ़ाकर देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत किया जा सके.

यह सैन्य बदलाव, नाटो द्वारा अपने सदस्य देशों से गठबंधन की रक्षा के लिए बढ़ाई गई मांगों के बाद किया जा रहा है. रक्षा मंत्री पिस्टोरियस ने नवंबर में एक सैन्य सम्मेलन के दौरान यह स्वीकार किया था कि सेना के लिए पर्याप्त संख्या में सैनिकों की भर्ती करना सबसे बड़ी चुनौती है.

सैन्य सेवा कार्यक्रम से भर्ती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

भर्ती के जोरदार प्रयासों की बदौलत, बुंडेसवेयर का आकार बढ़ रहा है, भले ही यह धीमी गति से हो रहा हो. मार्च 2026 के अंत तक, इस बल में लगभग 1,85,400 सक्रिय सैनिक थे, जो पिछले वर्ष के मार्च महीने की तुलना में 3,300 अधिक थे.

पिस्टोरियस को साल की शुरुआत में पेश की गई नई सैन्य सेवा योजना से काफी उम्मीदें हैं. इसमें कुछ फायदों और कुछ कड़े नियमों का तालमेल बिठाया गया है. जैसे, सभी युवाओं के लिए सैन्य जांच अनिवार्य कर दी गई है. इसके जरिए जर्मन सेना का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा स्वयंसेवी सैनिकों की भर्ती करना है.

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अगर यह कोशिश नाकाम रहती है, तो सेना में अनिवार्य भर्ती को फिर से लागू किया जा सकता है, जिसे जर्मनी ने 2011 में रोक दिया था. हालांकि, रक्षा राज्य सचिव निल्स हिल्मर ने सैन्य रणनीति पेश करते हुए इस बात पर जोर दिया कि फिलहाल यह उनके एजेंडे में शामिल नहीं है.

सैन्य रणनीति के अलावा व्यापक नीति पर जोर

सैन्य रणनीति के अलावा, पिस्टोरियस ने कई नीतिगत दस्तावेज भी पेश किए. एक तथा-कथित ‘केपेबिलिटी प्रोफाइल' उन क्षमताओं की रूपरेखा तैयार करता है जिन्हें सेना के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो इससे पता चलता है कि देश की रक्षा के लिए क्या आवश्यक है. साथ ही, ‘नाटो गठबंधन की सुरक्षा और दुश्मनों को रोकने' के लिए क्या जरूरी है.

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वहीं दूसरी ओर, ‘रिजर्व रणनीति' का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2033 तक जर्मनी के पास लगभग 2,00,000 रिजर्व सैनिक तैयार हों. ये सैनिक ‘सेना और सामान्य नागरिकों के बीच एक कड़ी' के रूप में काम करेंगे. इनका मुख्य काम देश की आंतरिक सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था संभालना होगा.

इन दोनों दस्तावेजों का विवरण भी काफी हद तक गोपनीय रखा गया है.

जर्मन नौकरशाही से निपटने के सैकड़ों उपाय

तथाकथित ‘प्रशासनिक सुधार और आधुनिकीकरण' नाम की इस योजना का मकसद जर्मन सेना के भीतर फैली जरूरत से ज्यादा नौकरशाही को खत्म करना है. फिलहाल, सेना के जवानों को ढेर सारे नियमों और कागजी कार्रवाई के मकड़जाल से गुजरना पड़ता है.

रक्षा मंत्रालय ने सभी नियमों की जांच की है और इस स्थिति को सुधारने की योजना बनाई है. इसके लिए, करीब 153 उपाय और 580 ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि योजना को सही तरीके से लागू किया जा सके.

पिस्टोरियस ने घोषणा की, "अब सेना के सभी आंतरिक नियमों की एक तय समय सीमा होगी.” अगर उस तारीख के बाद वे नियम जरूरी नहीं पाए गए, तो वे अपने-आप खत्म हो जाएंगे. साथ ही, भविष्य में हर सैनिक के पास एक ‘बुंडेसवेयर वॉलेट' (डिजिटल वॉलेट) होगा, जिसमें उनके सभी जरूरी दस्तावेज़ डिजिटल फॉर्मेट में मौजूद रहेंगे.

बुंडेसवेयर की नई सोच

जर्मन सेना ‘बुंडेसवेयर' के लिए पेश किए गए किसी भी दस्तावेज में अब कई सालों के लिए कोई निश्चित लक्ष्य तय नहीं किए जाएंगे. इसके बजाय, इन दस्तावेजों को ‘जीवंत दस्तावेज' के रूप में रखा जाएगा, जिनमें हालात के हिसाब से लगातार बदलाव किए जा सकेंगे. यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि दुनिया के सुरक्षा हालात किस दिशा में जा रहे हैं.

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इस नई रणनीति के साथ बुंडेसवेयर खुद को पहले से कहीं अधिक लचीलेपन की ओर ले जा रही है और एक तरह से नई मानसिकता को अपना रही है. पिस्टोरियस ने कहा, "हम पुरानी और संकीर्ण ‘साइलो मानसिकता' से दूर जाना चाहते हैं.”

जहां तक राजनीतिक विपक्ष की बात है, सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी के रक्षा प्रवक्ता उलरिष थोडेन ने इस सैन्य रणनीति को "तार्किक और जरूरी” बताया. उन्होंने कहा कि रूस के आक्रामक कदमों से पैदा हुए वास्तविक खतरे को देखते हुए यह कदम आवश्यक है. हालांकि, उनकी राय में जर्मनी के लिए "एक बड़ी सैन्य शक्ति बनने का लक्ष्य रखना” जरूरी नहीं है.

यह लेख मूल रूप से जर्मन में लिखा गया था.

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