कोलकाता, 1 जून: पश्चिम बंगाल विधानसभा (West Bengal Legislative Assembly) में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों के 'फर्जी हस्ताक्षर' विवाद (Signature Forgery Case) ने अब एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक रूप ले लिया है. पश्चिम बंगाल पुलिस (West Bengal Police) के सूत्रों के अनुसार, राज्य अपराध जांच विभाग (CID) ने इस मामले की गहन जांच के लिए सोमवार को एक पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है. इस हाई-लेवल एसआईटी की कमान पश्चिम बंगाल पुलिस के एक पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) को सौंपी गई है. दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी सोमवार को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए. यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में सियासी भूचाल: तृणमूल कांग्रेस ने दो विधायकों को पार्टी से निकाला, विधानसभा 'फर्जी हस्ताक्षर' विवाद के बाद सीआईडी जांच तेज
सीआईडी के समक्ष पेश नहीं हुए अभिषेक बनर्जी; पत्र भेजकर दिया जवाब
जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी के मूल प्रस्ताव (Original Resolution) की कॉपी के साथ पेश होने के लिए समन जारी किया था. हालांकि, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सूत्रों ने पुष्टि की है कि बनर्जी ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने कानूनी प्रतिनिधि के माध्यम से सीआईडी को एक औपचारिक पत्र भेजा है. यह कानूनी घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ा हुआ है और जांच का दायरा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला; तीन विधायकों ने कबूला सच
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) के तहत कानून अपना काम करेगा और फर्जी हस्ताक्षर करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
सुवेंदु अधिकारी ने घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए बताया कि 9 मई को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजा था, जिसमें सोवनदेब चट्टोपाध्याय को प्रतिपक्ष का नेता, नैना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त करने का प्रस्ताव था. इसके बाद 20 मई को 70 विधायकों के हस्ताक्षरों वाला एक और पत्र सौंपा गया.
विवाद तब गहराया जब टीएमसी के ही दो विधायकों—रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा—ने आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई कि संसदीय दल द्वारा ऐसा कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया था. मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि सीआईडी ने कई विधायकों के हस्ताक्षरों के नमूने लिए हैं, जिनमें से तीन टीएमसी विधायकों—बहारुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाशीष दास—ने सीआईडी के समक्ष स्वीकार किया है कि दस्तावेज पर दिख रहे हस्ताक्षर उनके नहीं हैं.
शांति बनाए रखने की अपील और दो विधायकों का निष्कासन
हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद कई टीएमसी पार्टी कार्यालयों से हुई सामग्रियों की बरामदगी पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने नागरिकों और भाजपा कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा, 'कई टीएमसी कार्यालयों में बहुत सी चीजें देखी गई हैं, जिन पर पुलिस कानूनी कार्रवाई करेगी. मेरी सभी नागरिकों और भाजपा कार्यकर्ताओं से प्रार्थना है कि कानून अपने हाथ में न लें और जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा रखें.'
इस बीच, संगठनात्मक स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शिकायतकर्ता विधायक रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है.













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