जर्मनी: चुनाव से पहले एएफडी ने जारी किया 100 दिन का एक्शन प्लान, शरणार्थियों के लिए कड़े नियम

जर्मनी के सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य में होने वाले चुनावों से पहले धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) ने अपना 100 दिन का एक्शन प्लान जारी किया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी के सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य में होने वाले चुनावों से पहले धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) ने अपना 100 दिन का एक्शन प्लान जारी किया है. इस प्लान में शरणार्थियों के लिए डिटेंशन सेंटर को बढ़ाने औरशनिवार को सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य की राजधानी माग्देबुर्ग में हुए एक सम्मेलन में, राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए एएफडी के उम्मीदवार उलरिष जीगमुंड ने अपनी पार्टी का 100 दिन का कार्यक्रम पेश किया. यह प्लान तब लागू किया जाएगा, जब पार्टी इस साल सितंबर में होने वाले चुनावों में जीतकर पहली बार सत्ता में आएगी.

100 दिन के प्लान में क्या है खास?

अगर एएफडी 6 सितंबर को होने वाले चुनाव में जीतकर सत्ता में आती है, तो उसने इन 10 प्रमुख बिंदुओं को तुरंत लागू करने का वादा किया है:

शरणार्थियों के लिए सख्त नियम: डिटेंशन सेंटरों का विस्तार और शरणार्थियों के लिए अनिवार्य रूप से काम करने की योजना लागू करना.

शिक्षा में बदलाव: शरणार्थियों के बच्चों के लिए अलग से विशेष कक्षाएं और ऐसे स्कूलों को 'समस्याग्रस्त स्कूल' नाम दिया गया है, इनमें सुरक्षा गार्डों की तैनाती का प्रस्ताव है.

प्रतीकों पर राजनीति: स्कूलों में एलजीबीटी+ समुदाय के प्रतीक रेनबो फ्लैग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाएगा और इसकी जगह सिर्फ जर्मनी का राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा.

फंडिंग में कटौती: पार्टी से जुड़े फाउंडेशन्स और लोकतंत्र कार्यक्रमों के लिए फंडिंग में कमी की जाएगी.

मीडिया और लाइसेंस: राज्य के ब्रॉडकास्टिंग एग्रीमेंट्स खत्म किए जाएंगे और लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए समर्थन दिया जाएगा.

जीगमुंड ने अपने भाषण में कहा, "लोग राजनीतिक बदलाव चाहते हैं. अन्य सभी पार्टियां अब केवल हमारी ही चिंता कर रही हैं, उनके पास अपना खुद का कोई विजन नहीं है."

चुनाव में क्या है एएफडी की स्थिति?

सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है. हाल ही में आए सर्वे के मुताबिक, आप्रवासी विरोधी यह पार्टी 41 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे चल रही है. उसने जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स (सीडीयू) को काफी पीछे छोड़ दिया है. इसके अलावा, उत्तर-पूर्वी राज्य मेक्लेनबुर्ग-फोरपॉमारन में भी पार्टी सर्वे में लीड कर रही है, जहां दो हफ्ते बाद बर्लिन के साथ चुनाव होने हैं.

41 फीसदी के इस भारी समर्थन के साथ, एएफडी राज्य विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल करने के बेहद करीब है, हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कितनी छोटी पार्टियां 5 फीसदी का आंकड़ा पार करने से चूक जाती हैं. अगर ऐसा होता है, तो एएफडी अन्य पार्टियों द्वारा बनाई गई 'फायरवॉल' (एएफडी के साथ काम ना करने की नीति) को तोड़कर पहली बार किसी राज्य में अपनी सरकार बना लेगी.

हालांकि, जानकारों का मानना है कि एएफडी के इस 100 दिन के प्लान को लागू करने में कई कानूनी और लॉजिस्टिक रुकावटें आ सकती हैं.

धुर-दक्षिणपंथ का ठप्पा और विवाद

पार्टी सम्मेलन में, प्रतिनिधियों ने मार्टिन राइषहार्ट को 23 के मुकाबले 191 वोटों से फिर से एएफडी का राज्य अध्यक्ष चुन लिया. राइषहार्ट 2018 से सैक्सनी-अनहाल्ट में पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और जर्मनी की संसद के निचले सदन (बुंडेस्टाग) के सदस्य भी हैं.

हाल ही में राइषहार्ट एक बड़े विवाद में घिरे थे. एक पॉडकास्ट जांच में उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने पार्टी सहयोगियों के सामने नाजी सलामी दी थी. 'इनसाइड द एएफडी' पॉडकास्ट द्वारा साझा की गई 2020 की एक तस्वीर में राइषहार्ट अपना बायां हाथ फैलाए हुए नजर आए थे. इसके बाद कई राजनेताओं ने उनसे इस्तीफा मांगा था.

इसके इतर घरेलू खुफिया एजेंसियों ने एएफडी की सैक्सनी-अनहाल्ट शाखा को आधिकारिक तौर पर एक "धुर-दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन" घोषित किया हुआ है. इस क्षेत्रीय चैप्टर के करीब 3,500 सदस्य हैं. फिलहाल इस राज्य में सीडीयू, सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेट्स (एसपीडी) और फ्री डेमोक्रेट्स की गठबंधन सरकार है.

सैक्सनी-अनहाल्ट में चुनाव 6 सितंबर को होने वाला है. इस राज्य में करीब 18 लाख मतदाता हैं. अन्य जर्मन राज्यों की तुलना में यहां की आबादी तेजी से घट रही है और अधिक बुजुर्ग होती जा रही है.

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