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रूस के आर्थिक फोरम में हिस्सा लेंगे जर्मन नेता और कारोबारी

चार साल बाद जर्मन कंपनियां और धुर दक्षिणपंथी नेता रूसी अर्थिक मंच में शामिल होने जा रहे हैं.

रूस के आर्थिक फोरम में हिस्सा लेंगे जर्मन नेता और कारोबारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

चार साल बाद जर्मन कंपनियां और धुर दक्षिणपंथी नेता रूसी अर्थिक मंच में शामिल होने जा रहे हैं. रूस में व्यापार के बारे में क्या सोचती हैं जर्मन कंपनियां?रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में यह आर्थिक फोरम 3-6 जून तक चलेगा. पिछले सालों की तरह इस साल भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसकी मेजबानी करेंगे. जर्मन-रूसी चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन माथियास शेप ने समाचार एजेंसी डीपीए से कहा, "खासकर युद्ध विराम के बाद की अवधि को ध्यान में रखते हुए दूसरे प्रमुख पश्चिमी देशों की तरह हम भी रूस के साथ आर्थिक पुल को बनाए रखना चाहते हैं ताकि रूस में 100 अरब यूरो से ज्यादा की जर्मन संपत्ति की रक्षा की जा सके."

अमेरिकी और फ्रेंच कंपनियों की फोरम में वापसी

शेप ने बताया कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के जारी रहते हुए ही हजारों रूसी कंपनियों, संगठन और व्यक्तियों के साथ ही अमेरिकी और फ्रेंच प्रतिनिधियों ने भी पिछले साल इस कार्यक्रम में वापसी की. उन्होंने इसके कथित कारोबारी संवाद के कार्यक्रम में हिस्सा लिया. शेप का यह भी कहना है कि "पश्चिमी देशों को रूस, इसके विशाल बाजार और एशिया के लिए इसके कच्चे माल को देखते हुए इसे छोड़ना नहीं चाहिए." उन्होंने ध्यान दिलाया कि चीन के नागरिकों ने इस साल अब तक रूस में 1,400 कंपनियां शुरू की हैं.

सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के कार्यक्रम के मुताबिक कारोबारी संवाद में जर्मन प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. इनमें इकोनिवा ग्रुप के साथ रूस में डेयरी प्रोड्यूसर श्टेफान डुर और ग्लोबस होल्डिंग के प्रबंध निदेशक थोमास ब्रुच भी शामिल हैं.

ग्लोबस चेन उन 1,600 कंपनियों में शामिल है जो अब भी रूस में सक्रिय हैं. हालांकि युक्रेन युद्ध के चलते लगे प्रतिबंधों की वजह से जर्मनी और रूस के बीच कारोबार काफी घटा है और पिछले साल यह 10 अरब यूरो के स्तर पर आ गया. 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले से पहले जर्मनी रूस का सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार था. 2021 में यह कारोबार 59.7 अरब यूरो जबकि सबसे अधिक 80 अरब यूरो साल 2012 में था.

एएफडी के नेता जा रहे हैं रूस

जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के नेताओं को भी इस फोरम में आने का न्यौता मिला है. एएफडी के बाडेन वुर्टेमबर्ग राज्य के प्रमुख और सांसद मार्कुस फ्रोह्नमायर रविवार को रूस के लिए रवाना हुए. फ्रोह्नमायर का कहना है, "जर्मनी को ऐसी नीति की जरूरत है जिसमें एक बार फिर आपूर्ति की सुरक्षा, प्रतियोगितात्मकता और अपने नागरिकों के हितों पर ज्यादा ध्यान हो."

फ्रोह्नमायर ने कहा वह जानते हैं कि "इस दौरे को संवेदशीलता के साथ देखा जाएगा," हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी भागीदारी "का मतलब यूक्रेन में युद्ध का समर्थन नहीं है."

बिल्ड टैब्लॉयड के मुताबिक आयोजकों का कहना है कि जर्मन राज्य सैक्सनी के एएफडी चेयरमैन योर्ग उरबान भी फोरम में हिस्सा ले रहे हैं साथ ही यूरोपीय सांसद पेत्र बाइस्ट्रोन भी.

आयोजकों का कहना है कि जर्मन भागीदारों में कंडक्टर युस्टुस फ्रांत्स, बर्लिन के प्रकाशक होल्गर फ्रीडरिष और फिल्ममेकर और पत्रकार हुबर्ट साइपेल भी शामिल हैं.

रूस में कारोबार पर क्या सोचते हैं जर्मन

जर्मन-रशियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के 750 सदस्यों के बीच हुए एक नए सर्वे के मुताबिक लगभग सारी कंपनियां रूस में बने रहना चाहती हैं क्योंकि यह बाजार काफी अहम है. सर्वे में पूछे सवाल का जवाब देने वाले 265 लोगों में लगभग 75 फीसदी लोगों ने कहा कि वे रूस में अपने व्यापार के विकास से संतुष्ट हैं, बावजूद इसके कि उन्हें प्रतिबंधों की वजह से काफी नुकसान हुआ है.

लगभग 65 पीसदी मानते हैं कि पश्चिमी देशों के दंडात्मक उपायों का रूस की अर्थव्यवस्था पर काफी ज्यादा असर हुआ है. महज एक तिहाई से कुछ ज्यादा कंपनियां मानती हैं कि प्रतिबंधों का नुकसान रूस से ज्यादा जर्मनी को होगा जबकि करीब आधे लोगों ने कहा कि वे जर्मनी और रूस दोनों का समान रूप से नुकसान करेंगे.

रूसी तेल और गैस की खरीदारी बहाल करने के बारे में 65 फीसदी कारोबारी मानते हैं कि इसे तुरंत शुरू किया जाना चाहिए जबकि 31 फीसदी का मानना है, "सिर्फ यूक्रेन में युद्ध रुकने के बाद ही."

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 02, 2026 03:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).