Aviation Fuel Price Hike: 1 अक्टूबर से ₹16 प्रति लीटर महंगा हुआ जेट फ्यूल; क्या बढ़ेंगे हवाई टिकटों के दाम? जानें एयरलाइंस और यात्रियों पर असर
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने 1 अक्टूबर 2026 से विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है. घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल के दाम करीब ₹16 प्रति लीटर बढ़ाकर लगभग ₹121 प्रति लीटर से सीधे ₹137 प्रति लीटर कर दिए गए हैं. त्योहारी सीजन के दौरान हवाई यात्रा की मांग में उछाल के बीच यह संशोधन सामने आया है.
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नई दिल्ली: त्योहारी सीजन में हवाई यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने हर महीने की पहली तारीख को होने वाली समीक्षा के तहत 1 अक्टूबर 2026 से विमान ईंधन (ATF) की दरों में करीब ₹16 प्रति लीटर की भारी वृद्धि कर दी है.
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की दरें लगभग ₹121 प्रति लीटर से उछलकर करीब ₹137 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई हैं. अंतरराष्ट्रीय तेल मानकों (International Benchmarks) और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के चलते यह फैसला लिया गया है. यह भी पढ़ें: Commercial LPG Price Hike: 1 अक्टूबर से महंगा हुआ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर; दिल्ली में ₹62.50 तो पटना में ₹71.50 की बढ़ोतरी, घरेलू गैस के दाम स्थिर
क्या महंगे होंगे हवाई जहाज के टिकट?
एटीएफ की कीमतों में तेज उछाल से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत सीधे तौर पर प्रभावित होती है:
- परिचालन लागत में बड़ा हिस्सा: भारतीय विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) में लगभग 35% से 40% हिस्सा अकेले विमान ईंधन का होता है.
- किराए पर दबाव: ईंधन के दाम बढ़ने से एयरलाइंस पर बेस फेयर या फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का दबाव बढ़ता है.
- तुरंत बढ़ोतरी अनिवार्य नहीं: टिकटों के दाम तुरंत बढ़ेंगे या नहीं, यह सीधे तौर पर बाजार की मांग, त्योहारी सीजन की बुकिंग, प्रतिस्पर्धी एयरलाइंस के रुख और रूट-वार सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करता है. यदि ईंधन की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहीं, तो कंपनियां लागत की भरपाई के लिए किराए में आंशिक वृद्धि कर सकती हैं.
लगातार दूसरे महीने बढ़े एटीएफ के दाम
घरेलू विमानन क्षेत्र के लिए ईंधन दरों में यह लगातार दूसरी मासिक वृद्धि है:
- सितंबर में इजाफा: इससे पहले सितंबर के महीने में भी जेट फ्यूल के दाम ₹6.28 प्रति लीटर (लगभग 46%) बढ़ाए गए थे।
- अगस्त का रुझान: अगस्त में भी इसमें करीब ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
- लगातार बढ़ती कीमतों का असर हर एयरलाइन पर उनके बेड़े (Fleet) की ईंधन दक्षता, रूट नेटवर्क और विमान उपयोग के आधार पर अलग-अलग देखने को मिल सकता है.
कमर्शियल एलपीजी भी महंगी, पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस स्थिर
1 अक्टूबर के मासिक मूल्य संशोधन में ऊर्जा क्षेत्र के अन्य उत्पादों की स्थिति इस प्रकार रही:
- कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े: 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी ₹62.50 से अधिक की वृद्धि की गई है, जिससे होटल, रेस्तरां और खानपान प्रतिष्ठानों का बजट प्रभावित हुआ है.
- घरेलू रसोई गैस में राहत: आम घरों में इस्तेमाल होने वाले 2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में यह ₹942 के स्तर पर ही स्थिर है.
- पेट्रोल और डीजल अपरिवर्तित: देश भर में आम वाहन चालकों के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें पहले की तरह यथावत बनी हुई हैं.
हर महीने क्यों संशोधित होते हैं ATF के दाम?
विमानन नियामक और तेल मंत्रालय के अंतर्गत पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार, भारत में जेट फ्यूल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विदेशी मुद्रा दरों के आधार पर तय की जाती हैं:
- मासिक समीक्षा: हर महीने की 1 तारीख को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड और रिफाइंड प्रॉडक्ट्स के 15 दिनों के औसत भाव और डॉलर-रुपये की स्थिति के आधार पर नई दरें तय होती हैं.
- राज्यों के कर: इसके अतिरिक्त, अलग-अलग राज्यों के हवाई अड्डों पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर (VAT) के कारण भी विभिन्न शहरों में एटीएफ की अंतिम दरें भिन्न हो सकती हैं.
कुल मिलाकर, एयरलाइंस के लिए लागत में तेज इजाफा हुआ है, लेकिन त्योहारों के दौरान यात्री टिकटों पर इसका कितना असर दिखेगा, यह आने वाले दिनों में विमानन कंपनियों की मूल्य निर्धारण रणनीतियों से स्पष्ट होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 01, 2026 11:36 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

