फ्रांस: स्कूलों में बढ़ता तनाव, टीचर को छात्रा ने दिखाया चाकू
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

फ्रांस के स्कूलों से लगातार तनाव भरी खबरें आ रही हैं. ताजा घटना में 12 साल की एक स्कूल की लड़की क्लास में बड़ा सा चाकू लेकर पहुंची. जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी "अपने अंग्रेजी के शिक्षक को मारने की मंशा" से आई थी.यह घटना उत्तर-पश्चिमी फ्रांस के रेन्न शहर में 12 साल की एक स्कूली छात्रा ने कक्षा में पढ़ाई के दौरान शिक्षक की ओर चाकू घुमाया. शिक्षक दौड़कर वहां से भाग गए. इस वारदात में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. स्कूल के कर्मचारी आरोपी से चाकू छीनने में कामयाब रहे. जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी छात्रा अपने अंग्रेजी के शिक्षक को मारने के इरादे से रसोई में इस्तेमाल होने वाला चाकू लाई थी.

समाचार एजेंसी एएफपी ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि आरोपी की अस्पताल में मनोचिकित्सक जांच कराई गई. इसमें पता चला कि वह "खुद के लिए भी खतरा है." आरोपी का परिवार मूल रूप से मंगोलिया का है और फ्रांस में रहता है. आरोपी, चार बच्चों में सबसे बड़ी है. यह परिवार 2012 से रेन्न शहर में रह रहा है.

फ्रांस के स्कूलों में तनाव बढ़ रहा है

फ्रांस के स्कूलों में स्थितियां ज्यादा तनावपूर्ण होती जा रही हैं. स्कूलों में मुस्लिम और यहूदी, दोनों समुदायों के छात्र काफी संख्या में हैं. हालिया समय में इस्राएल और आतंकवादी संगठन हमास के बीच जारी युद्ध भी तनाव की एक पृष्ठभूमि बन रहा है. छात्रों की अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक पृष्ठभूमि भी स्थितियां संवेदनशील बना रही हैं.

पिछले हफ्ते ही पेरिस के पास एक मिडिल स्कूल में एक शिक्षक ने कक्षा में छात्रों को 17वीं सदी की एक पेंटिंग दिखाई. रेनेसॉं दौर की इस पेंटिंग में एक ग्रीक मिथकीय कथा को दर्शाते हुए "नग्न" महिलाएं दिखाई गई थीं.

इस प्रकरण पर भी काफी हंगामा हुआ. इस प्रकरण का ब्योरा देते हुए शिक्षा मंत्री गेबरियेल अत्तल ने बताया, "कुछ छात्रों ने निगाहें चुराईं, अपमानित महसूस किया और कहा कि वे सदमे में हैं." अत्तल के मुताबिक, कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि क्लास में चर्चा के दौरान शिक्षक ने नस्ली टिप्पणियां कीं. इस प्रकरण पर एक छात्र के अभिभावक ने एतराज जताते हुए स्कूल को ईमेल भी भेजा.

शिक्षकों ने जताया विरोध

ऐसी सख्त प्रतिक्रियाओं के बाद संबंधित स्कूल के शिक्षकों ने 11 दिसंबर को इस घटना के विरोध में पढ़ाने से इनकार कर दिया. शिक्षकों ने अभिभावकों को भेजे गए ईमेल में लिखा कि स्कूल में पेश आ रही "मुश्किल स्थितियों" के मद्देनजर वो कक्षाओं से दूर रहने के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं. शिक्षकों ने ईमेल में यह भी लिखा कि "स्पष्ट तौर पर असहजता महसूस होना" और "हिंसा से जुड़े मामलों में तेजी" उनके लिए रोजमर्रा की सच्चाई बन गई है.

स्कूल में शिक्षकों का छात्रों के साथ होने वाला संवाद और क्लास में पढ़ाई गई चीजों पर खतरनाक और हिंसक प्रतिक्रिया की कुछ विचलित करने वाली घटनाएं अतीत में भी हुई हैं. दो महीने पहले ही, 13 अक्टूबर को फ्रांस के अरास शहर में 20 साल के एक कट्टरपंथी इस्लामिक युवा ने अपने पूर्व शिक्षक की हत्या कर दी.

शिक्षक की हत्या के मामले

इससे तीन साल पहले अक्टूबर 2020 में इतिहास और भूगोल के स्कूली शिक्षक सैमुअल पैटी को स्कूल के नजदीक ही पहले चाकू मारा गया और फिर उनका सिर काट दिया गया. यह हत्या एक 18 साल के युवा ने की थी, जो शरणार्थी पृष्ठभूमि का था. उसका परिवार चेचन्या से फ्रांस आया था.

हत्यारा, घटनास्थल पर ही पुलिस की गोली से मारा गया. पैटी की हत्या का संबंध सोशल मीडिया पर फैले उन संदेशों से जुड़ा था, जिनके मुताबिक पैटी ने व्यंगात्मक पत्रिका शार्ली एब्दो में छपे पैगंबर मोहम्मद के कार्टून क्लास में दिखाए थे.

इस मामले में छह अन्य किशोरों पर भी मुकदमा चला, जिसपर दिसंबर 2023 में अदालत का फैसला आया है. सैमुअल पैटी की हत्या के समय ये सभी 13 से 15 साल के थे. कोर्ट ने इन्हें हत्या में भूमिका निभाने का दोषी पाया.

इनमें से पांच पर आरोप था कि जब सैमुअल पैटी स्कूल से निकले, तो इन्होंने उनका पीछा किया और उनकी ओर इशारा करके हत्यारे युवक को उनकी पहचान बताई. जांच से पता चला है कि हत्यारे को सैमुअल पैटी का नाम और वह किस स्कूल में पढ़ाते हैं, ये पता था, लेकिन वह पैटी को पहचानता नहीं था. दोषी पाए गए किशोरों ने पैसे लेकर पैटी की पहचान जाहिर की.

जिस छठी किशोर को अदालत ने दोषी पाया, उसपर गलत आरोप लगाने और झूठी टिप्पणियां करने का इल्जाम साबित हुआ. पाया गया कि उसने घर पर अपने माता-पिता से कहा शिक्षक पैटी ने क्लास में कार्टून्स दिखाने से पहले मुस्लिम छात्रों को बाहर निकल जाने के लिए कहा.

सुनवाई के दौरान यह साबित हुआ कि उसने जिस दिन की घटना बताई थी, उस रोज वह खुद कक्षा में मौजूद तक नहीं थी. कोर्ट ने दोषी पाए गए किशोरों में से एक को छह महीने जेल की सजा सुनाई, वहीं बाकी पांच को सस्पेंडेड सजाएं सुनाई गईं.

ऐसी घटनाओं और इनकी बढ़ती नियमितता के कारण फ्रांस के स्कूलों में शिक्षकों के बीच खौफ बढ़ रहा है. जानकारों का कहना है कि सिलेबस पढ़ाने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र से जुड़े अहम पक्षों पर बच्चों को जागरूक करने, उनमें विमर्श की आदत डालने का नतीजा हत्या के रूप में सामने आ सकता है, यह आशंका बहुत भयावह है.

एसएम/एए (एएफपी, डीपीए)