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कतर: धमाके में मारे गए 13 में से 12 लोग भारतीय नागरिक
यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले से असंतुष्ट हैं ब्रिटिश युवा: सर्वे
यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले से असंतुष्ट हैं ब्रिटिश युवा: सर्वे
ब्रिटेन में साल 2016 में यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर निकलने के मुद्दे पर हुए जनमत संग्रह में जो युवा नाबालिग होने के कारण वोट नहीं दे पाए थे, वे अब ब्रेक्जिट को पूरी तरह असफल मान रहे हैं. थिंकटैंक 'मोर इन कॉमन' द्वारा 18 से 28 वर्ष के युवाओं पर किए गए एक नए सर्वे के अनुसार, इस पीढ़ी के अधिकांश युवा अब यूरोपीय संघ में वापस शामिल होने के लिए नए सिरे से मतदान की मांग कर रहे हैं. डेटा दिखाता है कि 60 प्रतिशत युवा मौका मिलने पर दोबारा यूरोपीय संघ में शामिल होने के पक्ष में वोट करना पसंद करेंगे, जबकि केवल 9 प्रतिशत लोग इसके बाहर रहने के हक में हैं.
अगर सर्वे में केवल उन युवाओं के आंकड़ों को देखा जाए जो कभी ऐसा जनमत संग्रह होने पर निश्चित रूप से मतदान करेंगे, तो यह अंतर और भी बड़ा हो जाता है. ऐसी स्थिति में ईयू में दोबारा शामिल होने के पक्ष में भारी बहुमत यानी 81 प्रतिशत वोट मिलेंगे, जबकि बाहर रहने के पक्ष में महज 19 प्रतिशत वोट ही पड़ेंगे. इस सर्वे से स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले से बेहद असंतुष्ट है.
ब्रिटेन के 440 युवाओं के बीच किए गए इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि 50 प्रतिशत ब्रिटिश जेन जी ब्रेक्जिट को एक नाकामी के रूप में देखते हैं. इसके विपरीत, केवल 16 प्रतिशत युवा ही इस ऐतिहासिक फैसले को एक सफलता मानते हैं, जबकि 34 प्रतिशत युवाओं की इस मामले में कोई स्पष्ट राय नहीं है.
कतर: धमाके में मारे गए 13 में से 12 लोग भारतीय नागरिक
कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल एरिया में रविवार, 21 जून की रात को हुए धमाके में 13 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है. कतर में भारतीय दूतावास के मुताबिक, इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में से 12 भारतीय नागरिक हैं. इनके अलावा, एक पाकिस्तानी नागरिक की भी मौत हुई है. दूतावास ने कहा है कि वे कतर के अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मृतकों के शवों को जल्द से जल्द भारत भेजा जाए.
न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, यह धमाका तब हुआ जब रविवार रात एक प्रमुख गैस निर्यात टर्मिनल में ऑपरेशन दोबारा शुरू करने के प्रयास किए जा रहे थे. कतर के ऊर्जा मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यह एक हादसा था, किसी तरह का हमला या शत्रुतापूर्ण घटना नहीं थी. उन्होंने बताया कि हादसे में 66 लोग घायल भी हुए, जिनमें कतर के अलावा एशिया और अफ्रीकी देशों के नागरिक शामिल हैं.
कतर दुनिया के शीर्ष प्राकृतिक गैस उत्पादकों में से एक है और रास लफ्फान इंडस्ट्रियल एरिया इसका प्रमुख केंद्र है. मार्च में ईरान ने रास लफ्फान पर मिसाइल हमला किया था, जिससे इसे भारी नुकसान पहुंचा था. इसके चलते कतर ने वहां उत्पादन बंद कर दिया था. अब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने के बाद कतर अपने इस निर्यात केंद्र को दोबारा शुरू करने का प्रयास कर रहा था, तभी यह हादसा हो गया.
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तालिबान को बातचीत के लिए ब्रसेल्स बुलाने की योजना का हो रहा विरोध
यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा ब्रसेल्स में तालिबान प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करने की योजना की कड़ी आलोचना हो रही है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और यूरोपीय संसद के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि इस बैठक से उस शासन को सामान्य करार दिए जाने का खतरा है, जिसने छठी कक्षा से आगे लड़कियों की स्कूली शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया है और महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह हटा दिया है. इसके साथ ही, तालिबान के इस प्रतिनिधिमंडल में दो ऐसे नेता भी शामिल हैं जिन पर मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप हैं.
बेल्जियम के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि उसने ब्रसेल्स में होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए तालिबान के प्रतिनिधिमंडल को पांच ‘सिंगल डे’ वीजा जारी किए हैं. ब्रसेल्स ने बैठक की तारीख साझा नहीं की है पर ‘द गार्डियन’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह बैठक मंगलवार, 23 जून को हो सकती है. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कुछ ही हफ्ते पहले यूरोपीय आयोग ने पुष्टि की थी कि वह अफगान प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए जनवरी से तालिबान के साथ बातचीत कर रहा है.
मानवाधिकार संगठनों और आलोचकों का कहना है कि यह बैठक यूरोपीय संघ के मूल्यों के खिलाफ है. हालांकि, यूरोपीय आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह बैठक तकनीकी स्तर की है और इसका मतलब तालिबान शासन को आधिकारिक मान्यता देना बिल्कुल नहीं है. वहीं, मेजबान देश होने के नाते बेल्जियम ने कहा है कि वह यूरोपीय संघ के संस्थानों द्वारा दिए गए निमंत्रणों को नहीं रोक सकता था.