Afghanistan Crisis: अराजकता के बीच काबुल में दुकानों पर लगे ताले, बाजार व स्कूल भी बंद
काबुल में अराजकता की स्थिति के बीच दुकानों को बंद कर दिया गया और बाजार व स्कूल बंद रहे. तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी को अपने कब्जे में ले लिया, जिससे पूरे शहर में व्यापक अराजकता फैल गई है.
काबुल, 17 अगस्त : काबुल (Kabul) में अराजकता की स्थिति के बीच दुकानों को बंद कर दिया गया और बाजार व स्कूल बंद रहे. तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी को अपने कब्जे में ले लिया, जिससे पूरे शहर में व्यापक अराजकता फैल गई है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के पतन के एक दिन बाद सोमवार को, तालिबान के सदस्य सड़कों पर देखे गए, लेकिन ऐसा लग रहा था कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं थे, क्योंकि कुछ सैन्य संस्थानों में लूटपाट हुई थी और चोरी के सैन्य वाहन सड़कों पर चल रहे थे.
आतंकवादी समूह ने चेतावनी दी है कि अगर कोई चोरी सहित किसी भी प्रकार का अपराध करता है तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा. कुछ स्कूलों में चल रही परीक्षाओं के चलते सुबह कुछ स्कूल खुले, लेकिन स्थिति बेहतर होने तक बंद करने की सलाह दी गई है. एक निवासी मोहम्मद आरिफ ने सोमवार को सिन्हुआ को बताया, "मैं अपने भविष्य और अपने बच्चों के भविष्य के बारे में निश्चित नहीं हूं. कोई नहीं जानता कि एक घंटे बाद क्या होगा, या मेरे बच्चे कल स्कूल जा सकते हैं कि नहीं." आरिफ ने कहा कि उनकी बेटी एक निजी विश्वविद्यालय में विधि संकाय की छात्रा है लेकिन नए शासकों के प्रतिशोध के डर से वह सोमवार को अपनी कक्षा में शामिल नहीं हुई. हालांकि शहर के पतन के बाद से अफगानिस्तान में कोई राष्ट्राध्यक्ष या सरकार नहीं है, तालिबान ने स्थानीय मीडिया पर एक संक्षिप्त बयान जारी कर सरकारी कर्मचारियों सहित निवासियों को अपने कार्यालयों में जाने और सामान्य काम जारी रखने के लिए कहा है.
हालांकि, काबुल में कई दुकानों और सुपरमार्केट की तरह, कई सरकारी विभाग के कार्यालय, बैंक और स्कूल सोमवार को बंद रहे क्योंकि तालिबान के सदस्य शहर की सड़कों पर या तो सैन्य वाहनों या पैदल गश्त करते रहे. एक अन्य निवासी, हामायोन ने सिन्हुआ को देश से भागने की अपनी योजना के बारे में बताया. उन्होंने कहा, "शायद आज, कल, परसों या कभी भी जब भाग्य मेरा साथ देगा,मैं देश छोड़ने की कोशिश कर रहा हूं." नौ साल तक राष्ट्रीय सेना में सेवा देने वाले 31 वर्षीय व्यक्ति ने स्थिति पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय समर्थन से 350,000 मजबूत रक्षा और सुरक्षा बलों का निर्माण किया था, लेकिन सभी को कुछ ही दिनों में खत्म कर दिया गया है." एक अन्य काबुल निवासी सूफी मोहम्मद ने कहा, 'सिर्फ सुरक्षा होना ही काफी नहीं है.' यह भी पढ़ें : Afghanistan Crisis: इंडियन एयरफोर्स के C-17 विमान से 120 से ज्यादा अधिकारी लौट रहे देश; भारत में प्रवेश के लिए फास्ट-ट्रैक वीजा देने की घोषणा
उन्होंने कहा, "सुरक्षा सुनिश्चित करने के अलावा, प्रतिष्ठान को नौकरी का अवसर प्रदान करना होगा, मानवाधिकारों का सम्मान करना होगा और समाज में नागरिकों को सम्मान करना होगा." अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने रविवार रात देश छोड़ दिया, जबकि तालिबान बलों ने काबुल की राजधानी में प्रवेश किया और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया. तालिबान ने आश्वासन दिया है कि काबुल में सभी राजनयिक मिशनों और विदेशी नागरिकों को कोई खतरा नहीं होगा. समूह के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि वे अफगानिस्तान की राजधानी में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मुजाहिद ने कहा कि काबुल के सभी जिलों पर अब विद्रोहियों का कब्जा है. तालिबान के एक अन्य प्रवक्ता ने कहा है कि अफगानिस्तान में युद्ध समाप्त हो गया है, और एक नई पॉवर स्ट्रक्चर जल्द ही स्पष्ट हो जाएगी. हिंसा को रोकने के लिए काबुल में रात का कर्फ्यू लगा दिया गया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 17, 2021 11:43 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

