Afghanistan Crisis: अफगानों ने तालिबान शासन से तेजी से निकालने की अमेरिका से गुहार लगाई

अमेरिकी सेना के साथ उनके काम के चलते खतरे में पड़े अफगान नागरिक और बाहर निकलने को बेताब अमेरिकी नागरिकों ने भी वाशिंगटन से लालफीताशाही में कटौती करने की अपील की है जिसके बारे में उनका कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अमेरिकी बल योजना के मुताबिक अफगानिस्तान से लौटते हैं तो हजारों कमजोर अफगान परेशानी में फंस सकते हैं.

सेना के जवान (Photo Credits: PTI/File Photo)

अमेरिकी सेना के साथ उनके काम के चलते खतरे में पड़े अफगान नागरिक और बाहर निकलने को बेताब अमेरिकी नागरिकों ने भी वाशिंगटन से लालफीताशाही में कटौती करने की अपील की है जिसके बारे में उनका कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अमेरिकी बल योजना के मुताबिक अफगानिस्तान (Afghanistan) से लौटते हैं तो हजारों कमजोर अफगान परेशानी में फंस सकते हैं. गैर सरकारी संगठन ‘एसेंड’ की अमेरिकी प्रमुख मरीना केलपिंस्की लेग्री ने कहा, “अगर हम इसे नहीं सुलझाते हैं, तो हम सचमुच लोगों की मौत का आधिकारिक आदेश दे रहे होंगे.” कई दिनों से जारी आंसू गैस और गोलियों की बौछार के बीच संगठन की युवा अफगान महिला सहकर्मी हवाई अड्डे पर उड़ानों की प्रतीक्षा कर रहे लोगों की भीड़ में शामिल हैं.

अमेरिका ने हवाई अड्डे को सुरक्षित करने के लिए सैनिकों, परिवहन विमानों और कमांडरों को भेजा है, तालिबान से सुरक्षित मार्ग की गारंटी मांगी है और एक दिन में 5,000 और 9,000 लोगों को लाने-ले जाने के लिए उड़ानें बढ़ा दी हैं. उप विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने अफगानों और सहयोगियों को सुरक्षित करने के लिए इसे अमेरिकी अधिकारियों का चौतरफा प्रयास बताया. लेकिन रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने इस संबंध में गंभीर टिप्पणी की है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमारे पास इतनी बड़ी संख्या में लोगों को निकालकर लाने की क्षमता नहीं है.” साथ ही कहा कि निकासी अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक हमारे पास समय है या जब तक हमारी क्षमताएं जवाब नहीं दे जाती हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी अफगान नागरिक थे जो अपना देश छोड़ना नहीं चाहते थे. यह भी पढ़ें : वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 9.4% रहने का अनुमान, कोरोना की दूसरी लहर के बाद हुई मजबूत रिकवरी

इनमें राष्ट्रीय पुलिस अधिकारी मोहम्मद खालिद वरदाक भी शामिल हैं जिन्होंने अमेरिकी विशेष बलों के साथ काम किया और यहां तक कि टेलीविजन पर तालिबान को लड़ाई तक की चुनौती दी थी. वह अमेरिकी बलों के देश से लौट जाने के बाद अपने गृह देश की रक्षा के लिए अपने देशवासियों के साथ खड़े रहना चाहते थे. लेकिन फिर चौंकाने वाली गति से, सरकार गिर गई. उनके राष्ट्रपति देश छोड़कर चले गए. और अब खालिद, छिपते फिर रहे हैं और इस उम्मीद में हैं कि अमेरिकी अधिकारी उनकी मदद कर उनकी वफादारी का इनाम देंगे और उन्हें एवं उनके परिवार को लगभग निश्चित मौत से बचाएंगे.

लेकिन समय और अमेरिकी नीति उनके पक्ष में नहीं हैं. समर्थकों का कहना है कि अफगानिस्तान में अमेरिका के लिए काम करने वाले अनुवादक, दुभाषिए और अन्य लोग विशेष अप्रवासी वीजा के लिए आवेदन करने के पात्र हैं, लेकिन वर्तमान अफगान सैन्य सदस्य या पुलिस अधिकारी इसके पात्र नहीं हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे शरणार्थी के दर्जे के लिए पात्र हो सकते हैं, लेकिन खालिद के समर्थकों का कहना है कि उनके परिवार को अब बाहर निकालने की जरूरत है. अमेरिकी सेना में उनके दोस्तों का कहना है कि वह एक भाई हैं जिन्होंने अनगिनत लोगों की जान बचाने में मदद की, और वे खालिद और उनकी पत्नी और चार बच्चों को काबुल हवाईअड्डे के अंदर लाने के लिए और कम से दूसरे किसी देश भेजने के लिए कांग्रेस, रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के सदस्यों से मदद की गुहार लगा रहे हैं

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