10 साल के भीतर ब्रिटेन में छठे पीएम का इस्तीफा
शुक्रवार को "मैं लड़ता रहूंगा" कहने वाले किएर स्टार्मर ने सोमवार सुबह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
शुक्रवार को "मैं लड़ता रहूंगा" कहने वाले किएर स्टार्मर ने सोमवार सुबह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. अब ब्रिटेन 10 साल में सातवें प्रधानमंत्री की राह तक रहा है.2024 में लेबर पार्टी को भारी बहुमत से चुनाव जिताने वाले किएर स्टार्मर ने सोमवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने सप्ताहांत में सोच विचार करने के बाद यह फैसला किया है. ब्रिटिश पीएम के आधिकारिक कार्यालय व निवास, 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर पत्रकारों को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा, "मैं लेबर पार्टी के नेता के तौर इस्तीफा दे रहा हूं. मैंने आज सुबह महामहिम महाराजा से बात की और उन्हें अपने निर्णय से अवगत कराया."
63 साल के स्टार्मर ने कहा कि वह नया प्रधानमंत्री चुने जाने तक कार्यवाहक पीएम के तौर पर पद पर बने रहेंगे. इस्तीफे का एलान करते हुए स्टार्मर ने कहा, "दो साल पहले इस सड़क पर चलना मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल था. एक नई लेबर सरकार. 14 साल में पहली बार. हमारे देश के इतिहास का एक पन्ना कई साल की हताशा और निराशा के बाद पलटा. लाखों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का अवसर आया. इसीलिए मैं राजनीति में आया था. इस बिंदु तक आने की यात्रा आसान बिल्कुल नहीं रही."
अब लेबर पार्टी, अपना नया नेता चुनेगी. माना जा रहा है कि पिछले हफ्ते के विशेष संसदीय चुनाव में जीतने वाले ग्रेटर मैनेचेस्टर के पूर्व मेयर, एंडी बर्नहम इस रेस में सबसे आगे हैं.
ब्रिटेन की राजनीति में यह ताजा उठापटक, ब्रेक्जिट जनमत संग्रह के ठीक 10 साल बाद हुई है. ब्रेक्जिट से अब तक ब्रिटेन ने पीएम पद से डेविड कैमरन, थैरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस, ऋषि सुनक और अब स्टार्मर का इस्तीफा देखा लिया है. यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद से ही ब्रिटेन अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आप्रवासन जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने के लिए कई कदम उठाता रहा है. लेकिन कोविड महामारी, यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की खलबली मचाने वाली नीतियों ने ब्रिटेन निरंतर दबाव में रखा है.
कैसे शुरू हुईं स्टार्मर की मुश्किलें
तीखी नोंक झोंक वाली ब्रिटिश राजनीति में स्टार्मर की छवि लंबे समय तक जेंटलमैन (भद्र पुरुष) की बनी रही. पेशे से वकील, स्टार्मर को राजनीति में आने से पहले 2014 में ब्रिटिश नाइटहुड के सम्मान से नवाजा गया. इस उपाधि के साथ ही उनके नाम के आगे "सर" लग गया. नाइटहुड उपाधि के साल भर बाद स्टार्मर ने संसदीय चुनाव जीता और वह लेबर पार्टी के सांसद बन गए. धीरे धीरे राजनीति की सीढ़ियों में आगे बढ़ते हुए स्टार्मर 2012 से विपक्ष में बैठी लेबर पार्टी का प्रमुख चेहरा बन गए. 2020 में उन्हें लेबर पार्टी का नेता चुना गया. इसके चार साल बाद 2024 में स्टार्मर नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित पहले ब्रिटिश पीएम बने.
स्टार्मर के अल्प कार्यकाल के दौरान भी ब्रिटेन में अर्थव्यवस्था और आप्रवासन बड़े मुद्दे बने रहे. दूसरी तरफ डॉनल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने और टैरिफ युद्ध छेड़ने से उनके सामने नई चुनौतियां आईं. विपरीत हवाओं के इन झोंकों से बचते बचाते स्टार्मर का सामना असली तूफान से जनवरी 2026 में हुआ, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने जब बच्चों के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलें रिलीज करना शुरू किया.
मामला 2024 में अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत की नियुक्ति का था. स्टार्मर पर आरोप लगे कि तमाम जानकारियों को नजरअंदाज कर उन्होंने पीटर मैंडेलसन को ब्रिटिश राजदूत नियुक्त किया. मैंडेलसन के जेफ्री एपस्टीन से करीबी रिश्ते थे. एपस्टीन फाइल्स से निकली इस जानकारी के बाद स्टार्मर, आए दिन बचाव की मुद्रा में रहने लगे. दूसरी तरफ देश में दक्षिणपंथी दलों की लोकप्रियता बढ़ने लगी. मैंडेलसन मामले में खुद स्टार्मर के कुछ मंत्रियों और लेबर पार्टी के अहम नेताओं ने अविश्वास का बिगुल बजा दिया. इसके बाद स्टार्मर की मुश्किलें बर्फ के लुढ़कते गोले की तरह लगातार बड़ी होती गईं.
कौन हैं एंडी बर्नहम
ग्रैजुएशन के बाद पत्रकारिता की पढ़ाई करने व कुछ समय तक पत्रकार के रूप में काम करने वाले 56 साल के एंडी बर्नहम दो बार पहले भी लेबर पार्टी के नेता बनने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उन दोनों मौकों पर उन्हें निराश होना पड़ा. अब बर्नहम के सामने तीसरा मौका है और स्टार्मर के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी के भीतर वही सबसे प्रमुख चेहरा बने हुए हैं.
बर्नहम दो अलग अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में मंत्री भी रह चुके हैं. फुटबॉल खेलने के शौकीन बर्नहम, पानी और ऊर्जा जैसे सेक्टरों में राष्ट्रीयकरण की हिमायत करते हैं. लंबे समय तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहने के दौरान ट्रांसपोर्ट समस्या हल करने का श्रेय काफी हद तक उन्हें दिया जाता है.
कोविड महामारी के दौरान बोरिस जॉनसन और उनके मंत्रियों ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किया. बर्नहम ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया और इसके साथ ही लेबर पार्टी के भीतर उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी. मई 2026 में हुए विशेष संसदीय चुनावों में लेबर पार्टी की इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में करारी हार हुई, लेकिन इसी दौरान बर्नहम अपने इलाके में धुर दक्षिणपंथी दलों पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे. इसी दौरान मार्करफील्ड के एक सांसद ने स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए बर्नहम के खातिर अपनी सीट छोड़ दी. उस सीट पर विजय के साथ ही बर्नहम अब एक दशक के भीतर ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बनने की राह में सबसे आगे दिख रहे हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 22, 2026 06:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

