Social Media Ban For Children: UAE समेत कई देशों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगाई रोक, देखें पूरी लिस्ट
सरकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. वहीं आलोचकों का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों को लागू करना आसान नहीं होगा और इससे निजता से जुड़े सवाल भी खड़े हो सकते हैं.
Social Media Ban For Children: दुनिया भर में बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है. ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और बढ़ते स्क्रीन टाइम को देखते हुए कई देशों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने या कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. इस सूची में शामिल होने वाला ताजा देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है, जिसने 18 जून को 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है. Social Media Ban! ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगेगा बैन, जानिए क्या हैं कारण
सरकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. वहीं आलोचकों का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों को लागू करना आसान नहीं होगा और इससे निजता से जुड़े सवाल भी खड़े हो सकते हैं.
बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध क्यों लगा रहे हैं देश?
विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जिनमें शामिल हैं:
साइबर बुलिंग
ऑनलाइन शोषण और शिकारी गतिविधियां
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
सोशल मीडिया की लत
अत्यधिक स्क्रीन टाइम
अनुचित और हानिकारक कंटेंट का संपर्क
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए कई सरकारें उम्र आधारित प्रतिबंधों और सुरक्षा उपायों को लागू कर रही हैं.
बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों की सूची
ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया दिसंबर 2025 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने वाला दुनिया का पहला देश बना. यह नियम फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक, एक्स, यूट्यूब, रेडिट और अन्य प्लेटफॉर्म पर लागू होता है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE): यूएई ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और उपयोग करने पर रोक लगाने का फैसला किया है. 15 और 16 वर्ष के किशोरों को विशेष सुरक्षा उपायों के साथ सीमित अनुमति दी जाएगी.
यूनाइटेड किंगडम (UK): ब्रिटेन की सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध की योजना की घोषणा की है. प्रस्तावित नियम 2027 तक लागू किए जा सकते हैं.
कनाडा: कनाडा ने हाल ही में एक डिजिटल सुरक्षा विधेयक पेश किया है, जिसके तहत 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है.
ऑस्ट्रिया: ऑस्ट्रिया 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है. इस संबंध में कानून का मसौदा तैयार किया जा रहा है.
डेनमार्क: डेनमार्क 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने की योजना बना रहा है. इसे 2026 तक कानून का रूप दिया जा सकता है.
फ्रांस: फ्रांस की संसद ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध संबंधी विधेयक पारित किया है. हालांकि इसे अभी सीनेट की मंजूरी मिलना बाकी है.
जर्मनी: जर्मनी में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है, लेकिन इसे अभी राजनीतिक समर्थन नहीं मिला है.
ग्रीस: ग्रीस ने जनवरी 2027 से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की योजना बनाई है.
इंडोनेशिया: इंडोनेशिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकटॉक, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है.
मलेशिया: मलेशिया ने भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने की घोषणा की है.
पोलैंड: पोलैंड की सत्तारूढ़ पार्टी 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने के लिए कानून तैयार कर रही है.
स्लोवेनिया: स्लोवेनिया 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच सीमित करने वाला कानून तैयार कर रहा है.
स्पेन: स्पेन 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी.
तुर्की: तुर्की की संसद ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने वाला विधेयक पारित कर दिया है. अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है.
बहस अभी भी जारी
जहां समर्थकों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे नियम जरूरी हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि आयु सत्यापन प्रणाली निजता के अधिकार को प्रभावित कर सकती है. इसके बावजूद दुनिया भर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त नियमों की मांग लगातार बढ़ रही है. आने वाले वर्षों में इन कानूनों की सफलता और प्रभावशीलता पर पूरी दुनिया की नजरें रहेंगी.