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आर्टेमिस 2 मिशन: कैसी है स्पेसक्राफ्ट के भीतर की जिंदगी?

नासा के आर्टेमिस 2 मिशन में चांद यात्रा पर निकले स्पेसक्राफ्ट के भीतर अंतरिक्ष यात्रियों की जिंदगी कैसी है?आर्टेमिस-2 के अंतरिक्षयात्रियों ने चंद्रमा के ऐसे नजारे देखे, जैसा पहले कभी इंसानी आंखों ने नहीं देखा था.

आर्टेमिस 2 मिशन: कैसी है स्पेसक्राफ्ट के भीतर की जिंदगी?
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

नासा के आर्टेमिस 2 मिशन में चांद यात्रा पर निकले स्पेसक्राफ्ट के भीतर अंतरिक्ष यात्रियों की जिंदगी कैसी है?आर्टेमिस-2 के अंतरिक्षयात्रियों ने चंद्रमा के ऐसे नजारे देखे, जैसा पहले कभी इंसानी आंखों ने नहीं देखा था. 5 अप्रैल को तड़के जब एस्ट्रोनॉट्स के सोने का समय हुआ, तब तक उनका अंतरिक्षयान पृथ्वी से लगभग 321,869 किलोमीटर दूर जा चुका था.

नासा ने आर्टेमिस क्रू की खींची एक तस्वीर साझा की, जिसमें चांद ओरिएनताले बेसिन के साथ नजर आ रहा था. नासा ने लिखा, "यह मिशन पहला मौका है, जब पूरे बेसिन को इंसानी आंखों ने देखा है."

स्पेसक्राफ्ट के भीतर कैसा इंतजाम है?

अंतरिक्षयात्री स्मूदी पी रहे हैं. मैक एंड चीज खा रहे हैं. फोन से तस्वीरें खींच रहे हैं. टॉइलेट खराब हो जाए, तो उसे ठीक भी कर रहे हैं. यह कहना तो सही नहीं होगा कि नासा के आर्टेमिस-2 मिशन पर गए चारों एस्ट्रोनॉट बड़ा सामान्य वक्त बिता रहे हैं. लेकिन हां, अंतरिक्षयान के भीतर उनकी जिंदगी में रोजमर्रा की कई आम चीजें भी शामिल हैं.

मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टिना कॉख, डीप स्पेस में गईं पहली महिला हैं. उन्होंने बताया कि 10 की चांद यात्रा की तैयारी करना कुछ-कुछ कैंपिंग की तैयारी जैसा था. ओरायन अंतरिक्षयान में खाने-पीने की जो चीजें भेजी गई हैं उनमें 58 टॉर्टिला, कॉफी के 43 कप और पांच तरह के सॉस शामिल हैं.

यह पहली बार है, जब डीप स्पेस में गए अंतरिक्षयात्रियों को एक असली टॉयलेट मिला है. इससे पहले 1960-70 के दशक के अपोलो अभियानों में अंतरिक्षयात्रियों को शौच के लिए खास 'वेस्ट कलेक्शन बैग' दिया गया था, जिसे वो चंद्रमा की जमीन पर छोड़ आए.

इस बार ओरायन में टॉयलेट है और इसमें योगदान है क्रिस्टिना कॉख का. पिछले हफ्ते अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, "मुझे खुद को स्पेस प्ल्मर बुलाने पर गर्व हो रहा है." कॉख ने कहा, "मुझे यह कहना अच्छा लगता है कि यह शायद ऑन बोर्ड सबसे अहम उपकरण है. तो जब इसने ठीक काम किया, तो हम सबने राहत की सांस ली."

यह टॉयलेट एक छोटे से कक्ष में है, दिक्कत यह है कि उसमें बहुत शोर होता है. तो एस्ट्रोनॉट जब भी टॉयलेट जाते हैं, उन्हें कान सुरक्षित करने वाला उपकरण लगाना पड़ता है.

मिशन कमांडर का आउटलुक काम नहीं कर रहा था

ओरायान में एक और परेशानी आई, मिशन कमांडर का माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक काम नहीं कर रहा था. नासा के लाइवस्ट्रीम में मिशन कमांडर रीड वाइसमैन ने बताया, "मैंने यह भी देखा कि मेरे पास दो माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक हैं और दोनों में से कोई काम नहीं कर रहा है." फिर ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल ने ईमेल की दिक्कत सुलझाई.

अंतरिक्षयात्रियों के लिए जरूरी है कि वे अपने सोने का ध्यान रखें. उन्हें एक स्लीप रूटीन का पालन करना है ताकि वे चांद उपकरणों की जांच करने और निगरानी करने जैसे जरूरी काम कर पाएं. सोने के लिए उनके पास स्लीपिंग बैग हैं, जो दीवार से बांध दिए जाते हैं. जिससे कि सोते समय वे तैरते ना रहें. रीड वाइसमैन ने बताया कि क्रिस्टिना कॉख, वाहन के बीच में यूं सोती हैं कि उनका सिर नीचे की तरफ होता है. वाइसमैन ने इसे चमगादड़ की तरह बताते हुए कहा कि यह काफी आरामदेह है.

अंतरिक्षयात्रियों के दिनभर के काम में 30 मिनट एक्सरसाइज करना भी शामिल है. माइक्रोग्रैविटी के कारण हड्डियों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है. अगर सावधानी ना बरती जाए, तो खासा नुकसान हो सकता है. इसीलिए व्यायाम जरूरी है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 05, 2026 08:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).