Viral 80s AI Photo Trend: इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहा 80 के दशक का रेट्रो लुक, लेकिन क्या ChatGPT पर अपनी तस्वीर अपलोड करना सुरक्षित है?
इंस्टाग्राम पर इन दिनों 80 के दशक के रेट्रो लुक वाली एआई-जनरेटेड तस्वीरों का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. लोग अपनी निजी तस्वीरें चैटजीपीटी पर अपलोड कर रहे हैं ताकि उन्हें विंटेज लुक मिल सके। हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई टूल्स पर अपनी तस्वीरें और बायोमेट्रिक डेटा साझा करने से भविष्य में गंभीर प्राइवेसी और सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं, जिनमें डीपफेक और पहचान की चोरी शामिल हैं.
नई दिल्ली: इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एआई-जनरेटेड (AI-generated) तस्वीरों की एक नई लहर छाई हुई है. उपयोगकर्ता अपनी सेल्फी को चैटजीपीटी (ChatGPT) पर अपलोड कर रहे हैं और उसे 1980 के दशक के यथार्थवादी रेट्रो लुक में बदल रहे हैं.
सितंबर 2026 की शुरुआत में इंस्टाग्राम रील्स, स्टोरीज और 'ऐड योर्स' (Add Yours) स्टिकर्स के जरिए यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हुआ है. इन तस्वीरों में लोगों को उस दौर के हेयरस्टाइल, फैशन, वार्म स्टूडियो लाइटिंग और फिल्म ग्रेन इफेक्ट के साथ देखा जा सकता है. हालांकि, प्राइवेसी शोधकर्ताओं और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया की इस क्षणिक वाहवाही के लिए मूल तस्वीरें अपलोड करना दीर्घकालिक जोखिम पैदा कर सकता है.
कैसे काम करता है 80s प्रॉम्प्ट ट्रेंड?
इस ट्रेंड का हिस्सा बनने के लिए उपयोगकर्ता आमतौर पर चैटजीपीटी खोलते हैं, अपनी एक साफ सेल्फी या पोर्ट्रेट अपलोड करते हैं और एक विस्तृत प्रॉम्प्ट (निर्देश) देते हैं.
- चेहरे की पहचान बरकरार: वे सिस्टम से कहते हैं कि चेहरे के नैन-नक्श, त्वचा के रंग और मूल पहचान को बनाए रखते हुए तस्वीर को 80 के दशक के लुक में बदल दे.
- बदल जाता है परिवेश: एआई कपड़ों, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड और फोटो के टेक्सचर को बदल देता है. एनिमेटेड या कैरिकेचर वाले पिछले एआई ट्रेंड्स के विपरीत, यह ट्रेंड चेहरे की पहचान को बरकरार रखते हुए केवल परिवेश को बदलता है.
अपलोड की गई तस्वीरों का क्या होता है?
जब कोई तस्वीर चैटजीपीटी पर अपलोड की जाती है, तो वह बातचीत (Conversation Data) का हिस्सा बन जाती है.
- ओपनएआई (OpenAI) की नीतियों के अनुसार, जब तक उपयोगकर्ता अपनी चैट डिलीट नहीं करता, तब तक वह उसके अकाउंट में सेव रहती है। चैट डिलीट करने के बाद भी कंपनी के सिस्टम पर 30 दिनों तक डेटा मौजूद रह सकता है.
- उपभोक्ता खातों के लिए, एआई मॉडल को प्रशिक्षित (Train) करने और बेहतर बनाने के लिए इमेजेस सहित अन्य कंटेंट का उपयोग किया जा सकता है, जब तक कि उपयोगकर्ता 'डेटा कंट्रोल्स' में जाकर इस सेटिंग को बंद न कर दे.
- विशेषज्ञों का कहना है कि तस्वीरों के साथ-साथ उनका मेटाडेटा (तारीख, डिवाइस का विवरण, जीपीएस लोकेशन) और बैकग्राउंड में मौजूद घरों के नंबर, वाहन की नंबर प्लेट या अन्य लोगों के चेहरे भी सर्वर पर जा सकते हैं.
बायोमेट्रिक और प्राइवेसी से जुड़े खतरे
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का जोर इस बात पर है कि चेहरे का डेटा अन्य व्यक्तिगत जानकारियों से बिल्कुल अलग और संवेदनशील होता है. "एक पासवर्ड बदला जा सकता है, लेकिन आपका चेहरा नहीं."
- काउंटरप्वाइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने 'टाइम्स नाउ टेक' को बताया कि यह एआई सिस्टम्स के लिए एक खजाना है। उन्होंने चेतावनी दी, "यह ट्रेंड खत्म होने के बाद भी डेटा लंबे समय तक सक्रिय रहेगा, जिससे बहुत ही परिष्कृत फ़िशिंग हमलों और बायोमेट्रिक्स के दुरुपयोग का खतरा पैदा हो सकता है."
- टेकआर्क (TechArc) के संस्थापक फैसल कावूसा ने इसे मॉडल सुधार के लिए 'क्राउडसोर्सिंग' का एक रूप बताया है, जहां उपयोगकर्ता अपनी मर्जी से तस्वीरें सौंप रहे हैं.
- इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन के वरिष्ठ स्टाफ टेक्नोलॉजिस्ट जैकब हॉफमैन-एंड्रयूज की सलाह है कि लोगों को ऐसी तस्वीरें अपलोड करने से बचना चाहिए जिन्हें वे हमेशा निजी रखना चाहते हैं.
सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ एआई टूल्स के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात नहीं करते, बल्कि सावधानी बरतने की सलाह देते हैं:
- अपलोड करने से पहले तस्वीरों से मेटाडेटा हटा दें और संवेदनशील बैकग्राउंड विवरणों को क्रॉप या ब्लर कर दें.
- बिना सहमति के अन्य लोगों या बच्चों की तस्वीरें अपलोड न करें.
- अज्ञात ऐप्स की जगह स्थापित प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें, प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें और एआई चैटबॉट में 'टेम्परेरी चैट' (Temporary Chat) मोड का उपयोग करें.
80 के दशक का यह रेट्रो लुक भले ही कुछ हफ्तों में सोशल मीडिया फीड से गायब हो जाए, लेकिन मूल तस्वीर की डिजिटल कॉपी उस प्लेटफॉर्म की डेटा नीतियों के अधीन हमेशा के लिए स्टोर हो सकती है. उपयोगकर्ताओं को हर अपलोड को केवल एक 'फिल्टर' न समझकर एक गंभीर डेटा निर्णय के रूप में लेना चाहिए.