Amazon Insults Aryabhata: अमेजन के विज्ञापन पर सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, 'आर्यभट्ट के अपमान' का आरोप लगाते हुए बहिष्कार की उठी मांग

ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन इंडिया अपने त्वरित-वाणिज्य प्लेटफॉर्म 'अमेजन नाऊ' के एक नए विज्ञापन अभियान को लेकर विवादों में घिर गई है. सोशल मीडिया पर कंपनी पर भारत के महान प्राचीन गणितज्ञ आर्यभट्ट का उपहास उड़ाने और उन्हें एक 'डिलीवरी बॉय' के रूप में पेश करने का आरोप लगाया जा रहा है.

अमेजन विज्ञापन विवाद (Photo Credits: X)

नई दिल्ली, 14 जून। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन इंडिया (Amazon India) के एक नए विज्ञापन अभियान को लेकर देश भर में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) और अन्य माध्यमों पर '#Boycott_Amazon' और 'अमेजन ने किया आर्यभट्ट का अपमान' (Amazon Insults Aryabhata) जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं. आलोचकों और कई संगठनों ने कंपनी पर व्यावसायिक लाभ के लिए भारत की महान ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विरासत का अवमूल्यन करने का आरोप लगाया है. विवाद बढ़ने के बाद हिंदू जनजागृति समिति (HJS) ने अमेजन को एक कानूनी नोटिस भेजकर 48 घंटे के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने और विज्ञापन को हटाने की मांग की है. यह भी पढ़ें: Amazon Layoffs: भारत समेत दुनिया भर में अमेज़न की बड़ी छंटनी, 16,000 कर्मचारियों पर गिरी गाज

मिस्ट्री कैंपेन से शुरू हुआ था पूरा मामला

यह विवाद 'अमेज़न नाऊ' (Amazon Now) सेवा के एक मल्टी-सिटी टीज़र अभियान के बाद शुरू हुआ. कुछ दिन पहले अहमदाबाद में हुए आईपीएल (IPL) फाइनल के दौरान प्राचीन गणितज्ञ आर्यभट्ट की वेशभूषा में एक व्यक्ति को स्टैंड्स में 'शून्य' (0) का प्लेकार्ड पकड़े देखा गया था. इसके बाद वही शख्स मुंबई और बेंगलुरु की सड़कों पर भी नजर आया, जिसने इंटरनेट यूजर्स के बीच भारी उत्सुकता और मीम्स की बाढ़ ला दी थी. लोगों को लगा कि यह किसी आगामी फिल्म या ओटीटी सीरीज का प्रमोशन है.

विज्ञापन की कहानी जिस पर मचा है बवाल

अमेजन द्वारा जारी किए गए मुख्य विज्ञापन में दिखाया गया है कि आर्यभट्ट आधुनिक भारत में कदम रखते हैं और समकालीन जीवन में 'शून्य' के महत्व और प्रासंगिकता की तलाश कर रहे हैं. अपनी इस यात्रा के दौरान वे कई जगहों पर भटकते हैं और देखते हैं कि रोजमर्रा के अनुभवों से शून्य गायब हो चुका है.

आखिरकार उनकी खोज क्विक-कॉमर्स (त्वरित डिलीवरी सेवाओं) पर आकर खत्म होती है, जहां डिलीवरी चार्ज और हिडन फीस के कारण ग्राहकों का बिल बढ़ जाता है. यहीं पर विज्ञापन अमेजन नाऊ की 'जीरो एडिशनल फीस' (शून्य अतिरिक्त शुल्क) की पेशकश को जोड़ता है और दिखाता है कि आर्यभट्ट असल में इसी शून्य को ढूंढ रहे थे.

अमेजन के विज्ञापन पर सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

अपने नए विज्ञापन को लेकर आलोचनाओं के घेरे में अमेजन

'उन्हें डिलीवरी बॉय बना दिया'— आलोचकों का तर्क

विवाद बढ़ने का मुख्य कारण विज्ञापन में दिखाया गया दृश्यांकन और संवाद हैं. आलोचकों का कहना है कि मानव सभ्यता को गणितीय क्रांति देने वाले ऋषि-तुल्य वैज्ञानिक को विज्ञापन में बेहद मजाकिया और व्यंग्यात्मक ढंग से स्कूलों और रॉकेट लॉन्चिंग पैड के आसपास भटकते दिखाया गया है.

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: एक वायरल पोस्ट में लिखा गया, "आर्यभट्ट के आविष्कारों ने गणित और खगोल विज्ञान को बदल दिया, लेकिन अमेजन के विज्ञापन ने उन्हें महज एक डिलीवरी बॉय के रूप में समेट दिया. भारत के महान विद्वानों का सम्मान गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) है." वहीं हिंदू संगठनों का तर्क है कि भारत की वैज्ञानिक पहचान को कॉर्पोरेट विज्ञापन के 'जीरो डिलीवरी शुल्क' जैसे सेल्स प्रमोशन से जोड़ना हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का अपमान है.

दो गुटों में बंटी जनता की राय

इस विवाद ने इंटरनेट यूजर्स को दो स्पष्ट धड़ों में बांट दिया है. जहां एक पक्ष इसे पवित्र ऐतिहासिक शख्सियत का अपमानजनक व्यावसायिकीकरण मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इस बहिष्कार के नैरेटिव का विरोध कर रहा है. समर्थकों का कहना है कि विज्ञापन में आर्यभट्ट का कोई अपमान नहीं है, बल्कि यह रचनात्मक ढंग से उनके सबसे महान योगदान 'शून्य' को ही केंद्र में रखकर बनाया गया है.

विज्ञापन उद्योग के विशेषज्ञों (Advertising Professionals) ने भी इस अभियान की सराहना की है. उनका मानना है कि इस कैंपेन ने सीधे उत्पाद बेचने के बजाय एक सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए देश भर में चर्चा पैदा की, जो मार्केटिंग के लिहाज से एक सफल प्रयोग है. बहरहाल, चौतरफा कानूनी और सामाजिक दबाव के बावजूद अमेजन इंडिया की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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