CWG 2026: पीरियड्स के पहले दिन उतरीं ज्ञानेश्वरी यादव, दर्द के बावजूद जीता सिल्वर मेडल; खुद किया बड़ा खुलासा
ज्ञानेश्वरी यादव का यह खुलासा महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली उन चुनौतियों को उजागर करता है, जिन पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती. पीरियड्स के पहले दिन दर्द और शारीरिक असहजता के बावजूद राष्ट्र के लिए पदक जीतना उनकी मानसिक मजबूती, साहस और समर्पण का शानदार उदाहरण है.
वीडियो- ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया कि उन्होंने अपने पीरियड्स के पहले दिन ही प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था:
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व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम वजन उठाया. कुल 199 किलोग्राम का भार उठाकर उन्होंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) प्रदर्शन किया और रजत पदक जीता.
महिलाओं की 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा के परिणाम:
| पदक | खिलाड़ी | देश | कुल वजन |
|---|---|---|---|
| 🥇 स्वर्ण | ओनोमे ओमोलोला डिडीह | नाइजीरिया | 206 किग्रा (93+113) |
| 🥈 रजत | ज्ञानेश्वरी यादव | भारत | 199 किग्रा (88+111) |
| 🥉 कांस्य | रेबेका ग्रूल्क्स | कनाडा | 178 किग्रा |
ज्ञानेश्वरी का यह पदक कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए वेटलिफ्टिंग में पांचवां पदक रहा.
वीडियो- ज्ञानेश्वरी यादव ने जीता सिल्वर मेडल:
पिता का अधूरा सपना किया पूरा
ज्ञानेश्वरी यादव की सफलता के पीछे उनके पिता दीपक यादव का बड़ा योगदान रहा है. पेशे से इलेक्ट्रीशियन दीपक यादव कभी बॉडीबिल्डर बनना चाहते थे, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया. उन्होंने अपनी बेटी को कम उम्र में ही वेटलिफ्टिंग की ओर प्रेरित किया और 13 वर्ष की उम्र में कोच अजय लोहार विश्वकर्मा के पास प्रशिक्षण के लिए भेजा.
राजनांदगांव जिले के भोड़िया गांव की रहने वाली ज्ञानेश्वरी वर्तमान में छत्तीसगढ़ पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक (Assistant Sub-Inspector) के पद पर भी कार्यरत हैं.
महिला खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा
ज्ञानेश्वरी यादव का यह खुलासा महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली उन चुनौतियों को उजागर करता है, जिन पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती. पीरियड्स के पहले दिन दर्द और शारीरिक असहजता के बावजूद राष्ट्र के लिए पदक जीतना उनकी मानसिक मजबूती, साहस और समर्पण का शानदार उदाहरण है.
उनका यह प्रदर्शन सिर्फ एक रजत पदक जीतने की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के दम पर बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है.