अमरावती, 27 मई: महाराष्ट्र (Maharashtra) के विदर्भ क्षेत्र (Vidarbha Region) के अमरावती (Amravati) शहर से एक बेहद रोमांचक और डरा देने वाली वन्यजीव घटना सामने आई है. शहर के सबसे घने, व्यस्त और जंगल क्षेत्र से काफी दूर स्थित रामपुरी कैंप (Rampuri Camp) आवासीय इलाके में मंगलवार दोपहर को अचानक एक 9 से 10 महीने का बिबट्या (तेंदुए का शावक) घुस आया. घनी बस्ती के बीचों-बीच एक खूंखार शिकारी जानवर को देखकर स्थानीय निवासियों और बच्चों के बीच भारी अफरा-तफरी और डर का माहौल पैदा हो गया. यह शावक सबसे पहले एक स्थानीय गोदाम (Godown) के पास देखा गया, जिसके बाद वह घबराकर पास की ही एक देसी शराब की दुकान के भीतर घुस गया और वहां रखे एक कूलर के ऊपर जाकर बैठ गया. वन विभाग, पुलिस और नगर निगम की टीमों ने सूझबूझ दिखाते हुए करीब 4 घंटे तक चले एक बेहद जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शावक को सुरक्षित रूप से बेहोश कर पिंजरे में बंद कर लिया. यह भी पढ़ें: Leopard Attack VIDEO: कर्नाटक के मांड्या में तेंदुआ घर की दीवार फांदकर सो रहे पालतू कुत्ते को उठा ले गया, CCTV वीडियो वायरल
दुकान का शटर गिराकर घेराबंदी; देखने उमड़ी हजारों की भीड़
यह वाकया मंगलवार दोपहर को तब शुरू हुआ जब महापौर श्रीचंद तेजवानी के भाई ने गोदाम परिसर के पास इस शावक को घूमते हुए देखा. उन्होंने बिना किसी देरी के इसकी सूचना तुरंत पुलिस और वन विभाग को दी. जैसे ही यह खबर फैली, पूरे रामपुरी कैंप क्षेत्र में सैकड़ों और फिर हजारों की संख्या में 'बघ्या' (तमाशबीनों) की भारी भीड़ जमा हो गई.
भीड़ और शोर-शराबे से घबराकर वह छोटा बिबट्या पास की ही एक बंद पड़ी दुकान के भीतर छिप गया. स्थिति को भांपते हुए स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और दुकान का मुख्य लोहे का शटर नीचे गिराकर उसे भीतर ही बंद कर दिया, ताकि वह किसी नागरिक पर हमला न कर सके.
तेंदुआ भीड़भाड़ वाले रामपुरी कैंप में घुस आया
#WATCH | A nine-to ten-month-old leopard entered the residential Rampuri Camp area in Maharashtra's Amravati. It was rescued after two to three hours by a rescue team comprising the police and the Amravati Municipal Corporation staff. (26.05) pic.twitter.com/Zty5CEFlTC
— ANI (@ANI) May 27, 2026
चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन: वनकर्मी पर हमले का प्रयास
सूचना मिलते ही गाडगे नगर पुलिस स्टेशन के पीआई गोरखनाथ जाधव के नेतृत्व में भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और बेकाबू हो रही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा घेरा तैयार किया. इसके तुरंत बाद आरएफओ प्रदीप भाद के नेतृत्व में वन विभाग की रेस्क्यू टीम जाल और आवश्यक उपकरणों के साथ घटना स्थल पर दाखिल हुई. इस टीम में अमोल गांवनेर, फिरोज खान, बाबूराव खेरकर और गजानन लांडे जैसे अनुभवी वनकर्मी शामिल थे.
शटर खोलकर जब रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, तो अंदर बंद शावक अत्यधिक डरा हुआ था और उसने बचने के लिए कई बार ऊंची छलांगें लगाईं. इस रोमांचक तफ्तीश के दौरान बिबट्या ने एक वनकर्मी पर सीधे झपटकर हमले का प्रयास भी किया, जिससे कुछ समय के लिए वहां मौजूद अधिकारियों के बीच भारी तनाव फैल गया. हालांकि, सुरक्षात्मक गियर के कारण वनकर्मी को कोई चोट नहीं आई.
डॉक्टरों की टीम ने किया ट्रैंकुलाइज; वडाली वन केंद्र भेजा गया
अंततः शाम करीब 6:30 बजे, अमरावती नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन बोंद्रे और 'वाइल्डलाइफ अवेयरनेस, रिसर्च एंड रेस्क्यू वेलफेयर सोसाइटी' के विशेषज्ञ नीलेश कंचनपुरे की मौजूदगी में शावक को एक सटीक ट्रैंकुलाइजर डार्ट (Tranquilizer Dart) मारा गया.
दवा का असर होने और शावक के पूरी तरह बेहोश हो जाने के बाद, वन विभाग के कर्मियों ने उसे बेहद सावधानी से जाली में लपेटकर लोहे के पिंजरे के भीतर सुरक्षित कर लिया. वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पकड़े गए शावक को तुरंत वडाली वन विभाग (Wadali Forest Facility) के चिकित्सा केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया है. वहां वन्यजीव डॉक्टरों द्वारा उसकी संपूर्ण शारीरिक और चिकित्सा जांच की जा रही है, जिसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास (जंगल) में छोड़ दिया जाएगा.












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