Viral MMS Case: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सानिया भारद्वाज ने वायरल वीडियो मामले पर तोड़ी चुप्पी; महिला पीड़ितों से की कानून पर भरोसा रखने की अपील
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सानिया भारद्वाज ने अपने नाम से वायरल हो रहे एक एमएमएस वीडियो मामले पर खुलकर बात की है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर इस घटना की पुष्टि की और अन्य महिला पीड़ितों को ऐसे साइबर उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने तथा पुलिस पर भरोसा रखने के लिए प्रेरित किया है.
मुंबई/धर्मशाला, 17 जून: मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर (Social Media Influencer) सानिया भारद्वाज (Saniya Bharadwaj) ने उनके नाम से इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे एक कथित वायरल एमएमएस (MMS) वीडियो मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. सानिया ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल (.sa.niyaaaa.) पर एक वीडियो (Reel) साझा कर सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि यह घटना उनके साथ घटी है. उन्होंने इस कृत्य के मुख्य दोषी को बेनकाब करने और उसे सख्त सजा दिलाने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया. सानिया ने अपने संदेश में उन महिलाओं और लड़कियों को ढाढस बंधाया जो डिजिटल स्पेस में इस तरह के साइबर उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग का शिकार होती हैं. उन्होंने पीड़ितों से अपील की कि वे ऐसे कठिन समय में डरे बिना देश की कानूनी व्यवस्था और साइबर पुलिस पर पूरा भरोसा रखें.
यह मामला हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें कुछ छात्रों के शामिल होने की बात भी सामने आई है. सानिया ने वीडियो में अपने व्यक्तिगत दर्द को साझा करते हुए बताया कि जब यह वीडियो सामने आया, तो उनके कुछ रिश्तेदारों और एक करीबी दोस्त ने उनका साथ देने के बजाय नकारात्मक रवैया अपनाया. उन्होंने कहा कि संकट के इस दौर में जो लोग बिना किसी शर्त के आपके साथ खड़े रहते हैं, वही आपके सच्चे शुभचिंतक हैं. यह भी पढ़ें: Priti Paswan Viral Video: प्रीति पासवान वायरल वीडियो स्कैम, 1 मिनट 48 सेकंड की कथित क्लिप पड़ सकती है भारी; खाली हो सकता है बैंक खाता
पायल गेमिंग केस से मिलती-जुलती घटना
सानिया भारद्वाज का यह मामला कुछ समय पहले देश में चर्चित रहे गेमिंग क्रिएटर पायल धारे (पायल गेमिंग) के मामले की याद दिलाता है. दिसंबर 2025 के मध्य में, पायल गेमिंग के नाम से एक 19 मिनट 34 सेकंड का कथित एमएमएस वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैलाया गया था. पायल ने तुरंत सामने आकर स्पष्ट किया था कि वह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल की मदद से तैयार किया गया एक 'डीपफेक' (Deepfake) वीडियो है, जिसका उद्देश्य उनकी छवि खराब करना था.
पायल ने इस मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस में प्राथमिकी (FIR No. 52/2025) दर्ज कराई थी। फॉरेंसिक जांच में वीडियो के एआई-मॉर्फ्ड होने की पुष्टि के बाद, पुलिस ने जनवरी 2026 की शुरुआत में वीडियो अपलोड करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पायल ने अपने करियर में शानदार वापसी की और वैश्विक क्रिएटर 'मिस्टर बीस्ट' (MrBeast) के साथ भी काम किया, जो यह साबित करता है कि सही समय पर कानूनी मदद लेने से ऐसे संकटों से उबरा जा सकता है.
सानिया भारद्वाज ने वायरल MMS स्कैंडल पर चुप्पी तोड़ी
क्या कहता है भारत का साइबर कानून?
इंटरनेट या सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीरें, वीडियो या मॉर्फ्ड कंटेंट (डीपफेक) साझा करना भारतीय कानून के तहत एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है. ऐसे मामलों में शामिल कानून और उनके तहत मिलने वाली अधिकतम सजा इस प्रकार है:
- वीडियो आगे फॉरवर्ड या सेंड करना: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67A के तहत इसे अश्लील सामग्री का प्रकाशन माना जाता है. पहली बार अपराध सिद्ध होने पर 5 साल की जेल और ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है.
- बिना सहमति के वीडियो बनाना: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77 (व्हॉयरिज्म/ताक-झांक) के तहत 3 साल तक की जेल का प्रावधान है.
- डीपफेक या मॉर्फिंग करना: आईटी एक्ट की धारा 66D (कंप्यूटर रिसोर्स का उपयोग कर धोखाधड़ी) के तहत 3 साल की कैद हो सकती है.
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी वायरल एमएमएस के लिंक या वीडियो को 'सिर्फ देखने' या 'दूसरों को सचेत करने' के लिए आगे बढ़ाना भी कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है.
पीड़ितों के लिए सानिया का संदेश
सानिया भारद्वाज ने डिजिटल उत्पीड़न का सामना कर रही सभी महिलाओं से कहा कि समाज या कुछ करीबियों के डर से घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में पुलिस और फॉरेंसिक टीमें तकनीक के सहारे अपराधियों तक बहुत तेजी से पहुंच रही हैं. साइबर विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में किसी भी असत्यापित वायरल लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये लिंक अक्सर मैलवेयर (वायरस) ट्रैप होते हैं जो यूजर्स का व्यक्तिगत डेटा भी चुरा सकते हैं. किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत नजदीकी साइबर सेल या 'cybercrime.gov.in' पर शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए.