Mahak Pari Viral Video: सोशल मीडिया पर 'महक-परी' के वीडियो लिंक का सच; क्लिक करने से पहले हो जाएं सावधान, खाली हो सकता है बैंक खाता
इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर "महक-परी का वायरल वीडियो लिंक" के नाम से फैलाई जा रही पोस्ट्स पूरी तरह से फर्जी और एक खतरनाक साइबर स्कैम हैं। यूज़र्स को अश्लील थंबनेल और सनसनीखेज दावों के जरिए फंसाकर उनके डिवाइसेज में मैलवेयर डाउनलोड कराने और निजी डेटा चुराने का यह एक सोची-समझी साजिश है.
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नई दिल्ली: सोशल मीडिया नेटवर्क (Social Media) पर इस हफ्ते डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स "महक और परी" (Mehak and Pari) के कथित आपत्तिजनक वीडियो और एमएमएस (MMS) लीक होने के दावों वाली पोस्ट्स की बाढ़ आ गई है. एक्स (X), टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स पर संदिग्ध हाइपरलिंक्स और धुंधली तस्वीरें धड़ल्ले से साझा की जा रही हैं, जिसके कारण गूगल पर "महक परी की वायरल वीडियो" (Mahak Pari's Viral Video) की सर्चिंग में जबरदस्त उछाल आया है. हालांकि, तकनीकी जांच और साइबर एक्सपर्ट्स के विश्लेषण से यह साफ हो गया है कि यह कथित वायरल वीडियो लिंक पूरी तरह से फर्जी है. यह लोगों की उत्सुकता का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाने वाला एक खतरनाक 'क्लिकबैट स्कैम' (Clickbait Scam) है. यह भी पढ़ें: Rok Hijau Viral Video: '3 मिनट 21 सेकंड' की क्लिप के चर्चा में आने के बाद नकली डाउनलोड लिंक सामने आए, रहें सावधान
कैसे काम कर रहा है महक-परी वीडियो का 'क्लिकबैट स्कैम'?
इंटरनेट पर सक्रिय जालसाज और साइबर अपराधी एक स्थापित 'साइबर फ्रॉड पैटर्न' का पालन कर रहे हैं. इन पोस्ट्स में अक्सर अश्लील स्क्रीनशॉट या किसी अन्य असंबंधित एडल्ट वीडियो के धुंधले थंबनेल का उपयोग किया जाता है. इनके साथ "अनधिकृत लीक" या "फुल ओरिजिनल वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें" जैसे आकर्षक और भ्रामक कैप्शन लिखे होते हैं.
जैसे ही कोई यूजर इन बाहरी हाइपरलिंक्स पर क्लिक करता है, उसे कोई वीडियो नहीं दिखाई देता. इसके बजाय, वह लिंक यूजर को एक के बाद एक कई स्पैम और असुरक्षित वेबसाइटों पर री-डायरेक्ट (भेज देना) करता है. ये वेब पेज मुख्य रूप से तीन तरह से नुकसान पहुंचाते हैं:
- मैलवेयर डाउनलोड: आपके स्मार्टफोन या कंप्यूटर में चुपके से जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर (Spyware) या वायरस डाउनलोड कर देना.
- फिशिंग ट्रैप: फर्जी टेक्निकल सपोर्ट अलर्ट दिखाना या सोशल मीडिया अकाउंट्स के नकली लॉगिन पेज खोलकर आपके पासवर्ड और यूजर आईडी चुरा लेना.
- प्रीमियम सब्सक्रिप्शन: यूजर्स को धोखे से अनचाहे और महंगे प्रीमियम नोटिफिकेशन या सेवाओं के लिए सब्सक्राइब करवा देना, जिससे उनके मोबाइल बैलेंस से पैसे कटने लगते हैं.
क्या है वायरल दावों की असली सच्चाई?
हकीकत यह है कि सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इन वीडियो क्लिप्स या स्क्रीनशॉट्स का महक या परी से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है. इंटरनेट पर मौजूद शातिर हैकर्स अक्सर किसी भी ट्रेंडिंग नाम (Trending Keywords) का इस्तेमाल अपनी वेबसाइट्स पर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए करते हैं.
इसके लिए वे इंटरनेट से कोई भी रैंडम वयस्क सामग्री उठाते हैं या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का उपयोग करके मीडिया को मैनिपुलेट करते हैं. चूंकि इन दोनों क्रिएटर्स का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है, इसलिए स्कैमर्स विज्ञापन राजस्व (Ad Revenue) कमाने और फिशिंग ट्रैप बिछाने के लिए इनके नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.
कौन हैं महक और परी? जानिए इनका विवादित बैकग्राउंड
महक और परी (जिन्हें पुलिस रिकॉर्ड में मेहरुलनिशा और निशा उर्फ परी के नाम से दर्ज किया गया है) उत्तर प्रदेश के संभल जिले के शाहबाज़पुर गाँव की रहने वाली दो सगी बहनें और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं. इंस्टाग्राम पर 'mehakpari143' हैंडल के जरिए शॉर्ट वीडियो रील्स बनाकर इन्होंने 4 लाख से अधिक फॉलोअर्स बटोरे थे.
ये दोनों बहनें पहली बार तब मुख्यधारा की राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आईं, जब संभल की अस्मोली थाना पुलिस ने इन्हें स्थानीय ग्रामीणों की भारी शिकायत के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. ग्रामीणों का आरोप था कि ये लड़कियां सस्ती लोकप्रियता और व्यूज पाने के लिए अपने वीडियो में अत्यधिक अश्लीलता, अभद्र इशारों और गंदी गालियों वाली भाषा का इस्तेमाल करती थीं, जिससे सामाजिक माहौल खराब हो रहा था. सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और सार्वजनिक अश्लीलता विरोधी कानूनों के तहत जेल जाने के बाद इन्हें जमानत मिली थी, जिसके बाद इनके परिवार ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसा अश्लील कंटेंट न बनाने की बात कही थी.
अंतिम निष्कर्ष: पूरी तरह फर्जी और असुरक्षित
डिजिटल सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद यह अंतिम फैसला (Verdict) दिया गया है कि इंटरनेट पर घूम रहा "महक परी वायरल वीडियो" पूरी तरह से फेक है. यूज़र्स को सख्त हिदायत दी जाती है कि वे ऐसे किसी भी लिंक को गूगल या सोशल मीडिया पर सर्च न करें, न ही इस तरह की भ्रामक पोस्ट्स को आगे शेयर करें. किसी भी अनवेरीफाइड यूआरएल (URL) पर क्लिक करना आपके डिवाइस की सुरक्षा और व्यक्तिगत बैंक खातों के लिए अत्यंत जोखिम भरा साबित हो सकता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 26, 2026 03:55 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

